PLI Scheme India: भारत और चीन के बीच बढ़ता व्यापार घाटा सरकार के लिए चिंता विषय बन गया है, चालू वर्ष के पहले नौ महीनों ूमें ही चीन के साथ भारत की व्यापार घाटा 100 अरब डाॅलर के आंकड़े को पार कर गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए केंन्द्र सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और चीन से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठा रही है, इसी बड़ी में करीब 120 ऐसे उत्पादों की पहचान की गई है।
सरकार की इस पहल में इंटरमीडिएट प्रोडक्ट्स यानी दूसरे उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के साथ कैपिटल गुड्स को भी शामिल किया गया है, कैपिटल गुड्स में मशीनरी और औद्योगिक उपकरण जैसी चीजें आती है। जिनका इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने से लिए किया जाता है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती
यह पहल केंन्द्र सरकार की व्यापाक ‘आत्मनिर्भर भारत’ रणनीति हिस्सा है,पश्चिम एशिया में जारी संकट के बाद जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति और विदेशी बाजाराें पर निर्भरता को लेकर चिंताएं फिर बढ़ी है।कोविड-19 महामारी के दौरान मेडिकल उपकरणों, दवाओं और अन्य जरूरी उत्पादों की आपूर्ति में आई दिक्कतों ने इस चुनौती को और स्पष्ट किया था। ऐसे में सरकार अब उन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है।
केमिकल से लेकर एयरोस्पेस तक के उत्पाद शामिल
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के नेतृत्व में इस योजना पर काम किया जा रहा है। पहचाने गए उत्पादों में एसिटिक एसिड जैसे केमिकल, फार्मास्युटिकल उत्पाद और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इनपुट शामिल हैं। इसके अलावा मेडिकल टेक्नोलॉजी से जुड़ी वस्तुओं, मशीन टूल्स, निर्माण उपकरणों और क्रेन जैसे औद्योगिक उत्पादों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।तीन स्तरों पर तैयार की जा रही रणनीति
सरकार संबंधित विभागों और एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे उपायों पर विचार कर रही है, जिनसे भारतीय उत्पादकों को विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिले। प्रस्तावित रणनीति के तहत तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा सकता है।
मोबाइल फोन उद्योग की तर्ज पर मिल सकता है समर्थन
इस पहल के तहत मोबाइल फोन उद्योग में अपनाई गई रणनीति से भी सीख ली जा सकती है, शुरुआती दौर में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से विभिन्न नीतिगत उपाय किए गए थे। अब इसी तरह की रणनीति दूसरे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में अपनाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।







