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Farmers were provided information on nutrition garden management.
Farmers were provided information on nutrition garden management.
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Nutrition Garden: सुरक्षित खाद्य उत्पादन और आहार विविधता पर जोर, 62 किसानों ने लिया प्रशिक्षण

Nutrition Garden: आईसीएआर-एनआईबीएसएम रायपुर ने 62 किसानों के लिए पोषण वाटिका प्रशिक्षण आयोजित किया। किसानों को फलदार पौधे और 18 प्रकार की सब्जियों के बीज वितरित किए गए।

कीर्तिमान डेस्क | धनेश्वरी साहू
25 Aug 2026, 05:29 PM
रायपुर
Nutrition Garden: आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-एनआईबीएसएम), रायपुर द्वारा किसानों में घरेलू पोषण सुरक्षा, आहार विविधता एवं सुरक्षित खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “पोषण वाटिका” विषय पर क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बरोंदा, मुर्रा, बेलटुकरी, देवगांव, कुर्रा एवं कथुरड गांवों के लगभग 62 किसान, जिनमें 10 महिला किसान शामिल थीं, ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आईसीएआर-एनआईबीएसएम के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किया। उन्होंने पोषण वाटिका के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि घर में ताजी, पौष्टिक एवं सुरक्षित सब्जियों तथा फलों की उपलब्धता परिवार के स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 

पोषण वाटिका से मजबूत होगी पोषण सुरक्षा

डॉ. पी. के. राय ने कहा कि असंतुलित एवं अपर्याप्त पोषण विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित एवं विविधतापूर्ण आहार आवश्यक है। उन्होंने किसानों से अपने घरों में पोषण वाटिका विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि जिन परिवारों के पास पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है, वहां आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी पोषण वाटिका विकसित की जा सकती है। इससे समुदाय स्तर पर पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी। 

पोषण वाटिका में सुरक्षित खेती के बताए उपाय

किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. पंकज शर्मा, संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक, ने स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पोषण वाटिका की स्थापना एवं प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने सलाह दी कि वर्षा की तीव्रता कम होने के बाद फलदार पौधों के रोपण के लिए उचित आकार के गड्ढे तैयार कर उनमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर पौधों का रोपण करें। उन्होंने जलभराव से बचाव तथा उचित जल निकास सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिक नमी की स्थिति में सब्जियों की खेती के लिए ऊंची उठी हुई क्यारियां तैयार करने तथा प्रारंभिक अवस्था में पौधों की उचित नर्सरी देखभाल, पोषण एवं सिंचाई प्रबंधन की सलाह दी। उन्होंने सब्जियों में कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए स्थानीय एवं पारंपरिक पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को कम कर सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण सब्जियों का उत्पादन किया जा सकता है।

किसानों को बांटे फलदार पौधे और सब्जियों के बीज

कार्यक्रम के दौरान किसानों को पोषण वाटिका के प्रमुख उद्देश्यों से अवगत कराया गया। इनमें ताजा, पौष्टिक एवं सुरक्षित भोजन की उपलब्धता, आहार विविधता को बढ़ावा देना, पोषक तत्वों की कमी को कम करना, रसोई के जैविक कचरे से खाद तैयार करना तथा कम लागत में घरेलू खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को उन्नत किस्म के अमरूद एवं नींबू के पौधे तथा लगभग 18 प्रकार की सब्जियों के बीज वितरित किए गए। इनमें पालक, धनिया, मेथी, चौलाई, भिंडी, लोबिया, तोरी, लौकी, ककड़ी, सेम और मूली सहित अन्य सब्जियों के बीज शामिल थे। किसानों को इनका उपयोग अपने घरों में पोषण वाटिका स्थापित करने के लिए करने हेतु प्रेरित किया गया।

किसानों की पोषण सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

इस अवसर पर सरपंच कंचन गायकवाड़ एवं संतोष कुर्रे भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. के. सी. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा किया गया। यह पहल किसानों की क्षमता निर्माण के साथ-साथ सुरक्षित खाद्य उत्पादन, आहार विविधता एवं घरेलू पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में आईसीएआर-एनआईबीएसएम के प्रयासों का हिस्सा है।
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