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बैंक की बंधक संपत्ति पर कब्जे का मामला
बैंक की बंधक संपत्ति पर कब्जे का मामला
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कब्जाधारी : बैंक की बंधक संपत्ति पर कब्जे का आरोप, युवक पर एफआईआर

दुर्ग में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की बंधक संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। बैंक की शिकायत पर पद्मनाभपुर थाना पुलिस ने एक युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि 26 लाख रुपये के होम लोन से जुड़ी संपत्ति को सरफेसी एक्ट के तहत सीलबंद किए जाने के बावजूद युवक ने दो बार ताला तोड़कर कब्जा कर लिया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 05 Jun 2026, 11:44 AM · अपडेट: 30 Oct 2026, 06:12 AM
दुर्ग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की बंधक संपत्ति पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। बैंक अधिकारियों की शिकायत पर पद्मनाभपुर थाना पुलिस ने एक युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि बैंक द्वारा सरफेसी एक्ट के तहत कब्जे में ली गई संपत्ति का सीलबंद ताला दो बार तोड़कर युवक ने जबरन कब्जा कर लिया और बैंक की वैधानिक कार्रवाई में बाधा उत्पन्न की।

जानकारी के अनुसार, सुभाष नगर कसारीडीह निवासी मोहम्मद कासिम खान और मोहम्मद नसीम खान ने 1200 वर्गफीट भूमि एवं मकान को बंधक रखकर छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक से 26 लाख रुपये का आवास ऋण लिया था। बाद में मोहम्मद कासिम खान के निधन के पश्चात सह-ऋणी नसीम खान द्वारा ऋण की नियमित अदायगी नहीं की गई, जिसके चलते बैंक खाता एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित हो गया।

सरफेसी एक्ट के तहत बैंक ने शुरू की वसूली प्रक्रिया

ऋण की लंबी अवधि तक वसूली नहीं होने पर बैंक ने सरफेसी एक्ट के प्रावधानों के तहत बंधक संपत्ति पर कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरू की। जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद बैंक ने कानूनी कार्रवाई करते हुए संपत्ति को अपने आधिपत्य में लिया और वहां कब्जे संबंधी सूचना भी चस्पा की। बैंक अधिकारियों के अनुसार, जिला दंडाधिकारी दुर्ग के आदेश पर 21 मार्च 2025 को तहसीलदार और पुलिस बल की मौजूदगी में मकान का भौतिक कब्जा लेकर उसे सीलबंद कर दिया गया था। आरोप है कि उसी दिन मृतक ऋणधारक के पुत्र मोहम्मद वसीम खान ने बैंक का ताला तोड़कर मकान में प्रवेश कर लिया और परिवार सहित वहां रहने लगा।

दूसरी बार भी प्रशासन ने कराया सीलबंद

पहली शिकायत के बाद बैंक ने प्रशासन से दोबारा हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद जिला दंडाधिकारी के निर्देश पर 10 मार्च 2026 को पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपत्ति को फिर से बैंक के कब्जे में लेकर सीलबंद किया गया। हालांकि बैंक का आरोप है कि इसके बावजूद वसीम खान ने दोबारा ताला तोड़कर मकान पर कब्जा कर लिया।

बैंक ने ऋण वसूली के लिए 27 अप्रैल 2026 को संपत्ति की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी बीच मोहम्मद वसीम खान ने बिलासपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 15 दिनों की अंतरिम राहत प्राप्त कर ली। इसके चलते प्रस्तावित ई-नीलामी को फिलहाल स्थगित करना पड़ा।

निरीक्षण में गायब मिले बैंक के सीलबंद ताले

बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक और एनपीए मैनेजर 28 अप्रैल 2026 को महिला पुलिसकर्मी के साथ संपत्ति का निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बैंक द्वारा लगाए गए सीलबंद ताले हटाए जा चुके थे और उनकी जगह अन्य ताले लगा दिए गए थे। साथ ही दीवारों पर स्प्रे पेंट से लिखी गई बैंक के भौतिक कब्जे की सूचना भी रंग-रोगन कर मिटा दी गई थी। बैंक अधिकारियों का दावा है कि आसपास के लोगों ने मौखिक रूप से बताया कि मोहम्मद वसीम खान ने ही ताला तोड़कर संपत्ति पर कब्जा किया है। हालांकि पुलिस इस संबंध में स्वतंत्र रूप से तथ्यों और साक्ष्यों की जांच कर रही है।

नामांतरण को लेकर भी उठे सवाल

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बंधक संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड से मृतक मोहम्मद कासिम खान का नाम हटाकर कथित रूप से मोहम्मद वसीम खान, नसीम Khan तथा उनकी दो बहनों के नाम दर्ज करा दिए गए। बैंक का कहना है कि बंधक संपत्ति में उसकी पूर्व अनुमति के बिना किसी प्रकार का नामांतरण नियमों के अनुरूप नहीं है और इस पूरे मामले की भी जांच आवश्यक है।

बैंक का आरोप है कि संपत्ति पर अवैध कब्जे और कब्जा संबंधी नोटिस हटाने की कार्रवाई से न केवल बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि ऋण वसूली की वैधानिक प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। बैंक ने इसे सरफेसी एक्ट के तहत की गई कार्रवाई में हस्तक्षेप माना है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी

क्षेत्रीय प्रबंधक एनी अंसारी की शिकायत पर पद्मनाभपुर थाना पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 329(3) और 324(3) के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस अब बैंक के दस्तावेजों, प्रशासनिक कार्रवाई, कब्जे की वैधानिक स्थिति तथा नामांतरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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