छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की बंधक संपत्ति पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। बैंक अधिकारियों की शिकायत पर पद्मनाभपुर थाना पुलिस ने एक युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि बैंक द्वारा सरफेसी एक्ट के तहत कब्जे में ली गई संपत्ति का सीलबंद ताला दो बार तोड़कर युवक ने जबरन कब्जा कर लिया और बैंक की वैधानिक कार्रवाई में बाधा उत्पन्न की।
जानकारी के अनुसार, सुभाष नगर कसारीडीह निवासी मोहम्मद कासिम खान और मोहम्मद नसीम खान ने 1200 वर्गफीट भूमि एवं मकान को बंधक रखकर छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक से 26 लाख रुपये का आवास ऋण लिया था। बाद में मोहम्मद कासिम खान के निधन के पश्चात सह-ऋणी नसीम खान द्वारा ऋण की नियमित अदायगी नहीं की गई, जिसके चलते बैंक खाता एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित हो गया।
सरफेसी एक्ट के तहत बैंक ने शुरू की वसूली प्रक्रिया
दूसरी बार भी प्रशासन ने कराया सीलबंद
पहली शिकायत के बाद बैंक ने प्रशासन से दोबारा हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद जिला दंडाधिकारी के निर्देश पर 10 मार्च 2026 को पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपत्ति को फिर से बैंक के कब्जे में लेकर सीलबंद किया गया। हालांकि बैंक का आरोप है कि इसके बावजूद वसीम खान ने दोबारा ताला तोड़कर मकान पर कब्जा कर लिया।
बैंक ने ऋण वसूली के लिए 27 अप्रैल 2026 को संपत्ति की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी बीच मोहम्मद वसीम खान ने बिलासपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 15 दिनों की अंतरिम राहत प्राप्त कर ली। इसके चलते प्रस्तावित ई-नीलामी को फिलहाल स्थगित करना पड़ा।
निरीक्षण में गायब मिले बैंक के सीलबंद ताले
नामांतरण को लेकर भी उठे सवाल
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बंधक संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड से मृतक मोहम्मद कासिम खान का नाम हटाकर कथित रूप से मोहम्मद वसीम खान, नसीम Khan तथा उनकी दो बहनों के नाम दर्ज करा दिए गए। बैंक का कहना है कि बंधक संपत्ति में उसकी पूर्व अनुमति के बिना किसी प्रकार का नामांतरण नियमों के अनुरूप नहीं है और इस पूरे मामले की भी जांच आवश्यक है।
बैंक का आरोप है कि संपत्ति पर अवैध कब्जे और कब्जा संबंधी नोटिस हटाने की कार्रवाई से न केवल बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि ऋण वसूली की वैधानिक प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। बैंक ने इसे सरफेसी एक्ट के तहत की गई कार्रवाई में हस्तक्षेप माना है।