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Disease outbreak in the paddy crop
Disease outbreak in the paddy crop
रायपुर संभाग

Paddy Farming: बारिश और बदली से धान की फसल पर रोग का संकट, बढ़ी किसानों की चिंता

Paddy Farming: लगातार बारिश और धूप की कमी से धान की फसल पर रोगों का प्रकोप बढ़ने लगा है। कई किसानों को दो से तीन बार बुवाई करने के साथ अतिरिक्त चलाई-निंदाई करनी पड़ी, जिससे खेती की लागत बढ़ गई। अब फसल में बीमारी के लक्षण दिखने से किसान चिंतित हैं। किसानों ने कृषि विभाग से प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर रोग की पहचान और उचित दवा की जानकारी देने की मांग की है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 29 Aug 2026, 10:28 AM · अपडेट: 02 Oct 2026, 09:26 AM
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Paddy Farming: पिछले करीब दो माह से रुक-रुककर हो रही बारिश और लगातार बनी बदली के चलते धान की फसल को पर्याप्त धूप नहीं मिल पा रही है। धूप की कमी का असर अब खेतों में साफ दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में धान की फसल पर विभिन्न प्रकार के रोगों का प्रकोप शुरू होने से किसान चिंतित हैं। फसल को बचाने के लिए किसानों को अब अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। इस खरीफ सीजन की शुरुआत से ही किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। 

किसानों को दोबारा करनी पड़ रही बुवाई

लगातार बारिश के कारण बड़ी संख्या में किसानों को कई खेतों में दो से तीन बार तक धान की बुवाई करनी पड़ी। पहली बार बोए गए धान के बीज बारिश के पानी में खराब होने अथवा पौधों के नष्ट होने के बाद किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी। इससे जहां किसानों का समय और मेहनत अधिक लगी, वहीं खेती की लागत भी बढ़ गई। बारिश और मौसम की अनिश्चितता के बीच धान की फसल को तैयार करने में किसानों को इस बार अधिक मेहनत करनी पड़ी। 

फसल में बीमारी के प्रकोप की नई चिंता 

खेतों में खरपतवार बढ़ने के कारण कई किसानों को धान की चलाई और निंदाई पहले की तुलना में अधिक बार करनी पड़ी। फसल को खरपतवार से बचाने के लिए मजदूरी और कृषि कार्यों पर अतिरिक्त राशि खर्च हुई। पहले ही दो-तीन बार बुवाई से आर्थिक बोझ झेल रहे किसानों पर यह अतिरिक्त खर्च और बढ़ गया। किसानों का कहना है कि धान की फसल को उगाने से लेकर चलाई और निंदाई तक लगातार मेहनत और खर्च किया गया, लेकिन अब जब फसल बढ़ने लगी है तो बीमारी के प्रकोप ने नई चिंता खड़ी कर दी है। लगातार बदली रहने के कारण खेतों में पर्याप्त धूप नहीं पहुंचने से फसल का विकास भी प्रभावित हो रहा है। 

खेती की लागत और बढ़ने की आशंका 

कई खेतों में धान के पौधों में बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि मौसम इसी तरह बना रहा और धूप नहीं निकली तो बीमारी का प्रकोप और बढ़ सकता है। ऐसे में फसल को बचाने के लिए दवाइयों का छिड़काव सहित अन्य उपाय करने पड़ सकते हैं, जिससे खेती की लागत और बढ़ने की आशंका है। इस खरीफ सीजन में किसानों को शुरुआत से ही मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। दो-तीन बार बुवाई, अतिरिक्त चलाई-निंदाई और अब फसल में बीमारी के प्रकोप के कारण खेती का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। 

बीमारी के रोकथाम के लिए उचित दवा की दे जानकारी 

किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में जितनी लागत लग रही है, उसके अनुपात में उत्पादन और उपज को लेकर भी चिंता बनी हुई है। किसानों की मांग है कि कृषि विभाग द्वारा प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर फसल में लगे रोग की पहचान की जाए तथा किसानों को बीमारी की रोकथाम के लिए उचित दवा और उसके उपयोग की जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि समय रहते फसल को बचाया जा सके।
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