Surguja News: मानसून की पहली बारिश जहां एक तरफ चेहरे पर खुशी लाती है, वहीं सरगुजा जिले के सुदूर वनांचल इलाके काशीडांड और चिताघुटरी के लोगों के लिए यह आफत की सौगात लेकर आती है। लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत पटकुरा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो हमारे विकास के दावों की जमीनी हकीकत को बयां करती है। यहां नदी पर पुल न होने के कारण स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को हर दिन जान हथेली पर रखकर उफनती नदी पार करनी पड़ रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इस खौफनाक मंजर की गवाही दे रहा है।
अपनी ही मुख्य पंचायत से कट जाता है संपर्क
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बेबस माता-पिता अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में उठाकर तेज बहाव के बीच नदी पार करा रहे हैं। एक मामूली सी चूक और बड़ा हादसा—इसी डर के साए में हर रोज काशीडांड से चिताघुटरी मार्ग का सफर तय हो रहा है। बरसात आते ही चिताघुटरी गांव का संपर्क ब्लॉक मुख्यालय और अपनी ही मुख्य ग्राम पंचायत से पूरी तरह कट जाता है। नदी में पानी भरते ही गांव के लोग अपनों के ही बीच कैद होकर रह जाते हैं। ग्रामीणों का दर्द सिर्फ बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है, यह जिंदगी और मौत का सवाल बन चुका है।
- शिक्षा पर ब्रेक: नदी का जलस्तर बढ़ते ही बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है, जिससे उनकी पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं की लाचारी: अगर कोई बीमार पड़ जाए, तो गांव तक एम्बुलेंस का पहुंचना नामुमकिन है। मरीजों को खाट या गोद में लादकर नदी पार कराना ही एकमात्र रास्ता बचता है।
राशन और जरूरी सामान की किल्लत: राशन की दुकान तक पहुंचने के लिए भी जान का जोखिम उठाना पड़ता है। दैनिक जरूरतों के सामान के लिए ग्रामीणों को इसी खौफनाक रास्ते से गुजरना होता है।
पुल निर्माण की मांग को लेकर काट रहे चक्कर
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक दिन या एक साल की बात नहीं है। लंबे समय से वे शासन-प्रशासन के चौखट पर पुल निर्माण की मांग लेकर चक्कर काट रहे हैं। हर बार आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का खामियाजा अब मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। गांव के अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारी आक्रोश और चिंता है।
वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए
ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन से गुहार लगाई है कि किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किए बिना, तुरंत नदी पर पुल या कम से कम कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि लोगों का जीवन पटरी पर लौट सके।

