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पाकिस्तान  की 28वीं परमाणु वर्षगांठ
पाकिस्तान की 28वीं परमाणु वर्षगांठ
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पकिस्तान : भारत के पोखरण टेस्ट के जवाब में पाकिस्तान ने किया था परमाणु परीक्षण

1998 में भारत के पोखरण परमाणु परीक्षण के जवाब में पाकिस्तान ने 28 मई को बलूचिस्तान के चागाई क्षेत्र में सफल परमाणु परीक्षण किए थे। इसी दिन को पाकिस्तान हर साल “यौम-ए-तकबीर” यानी महानता दिवस के रूप में मनाता है। इस वर्ष पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण की 28वीं वर्षगांठ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए।

प्रकाशित: 28 May 2026, 12:20 PM · अपडेट: 16 Sep 2026, 04:35 AM
इस्लामाबाद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
इस्लामाबाद, 28 मई। पाकिस्तान आज अपने परमाणु परीक्षण की 28वीं वर्षगांठ मना रहा है। हर साल 28 मई को पाकिस्तान में “यौम-ए-तकबीर” यानी “महानता दिवस” के रूप में मनाया जाता है। यह वही दिन है जब 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के चागाई जिले की रस कोह पहाड़ियों में सफल भूमिगत परमाणु परीक्षण किए थे। पाकिस्तान इन परीक्षणों को अपनी सुरक्षा, सामरिक ताकत और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक मानता है। देशभर में इस मौके पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ने इसे पाकिस्तान की रक्षा क्षमता का ऐतिहासिक क्षण बताया।

भारत के परमाणु परीक्षण

1998 में भारत द्वारा पोखरण-II परमाणु परीक्षण किए जाने के कुछ ही सप्ताह बाद पाकिस्तान ने भी परमाणु परीक्षण करने का निर्णय लिया था। भारत ने 11 और 13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में पांच परमाणु परीक्षण किए थे। इसके जवाब में पाकिस्तान ने 28 मई को चागाई क्षेत्र में और बाद में 30 मई को बलूचिस्तान के खारन क्षेत्र में अतिरिक्त परीक्षण किए।  दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन की राजनीति का यह सबसे बड़ा मोड़ माना जाता है।

ISPR ने दी राष्ट्र को बधाई

पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस यानी ISPR ने इस अवसर पर बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान के सशस्त्र बल देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। बयान में फील्ड मार्शल असिम मुनीर, एडमिरल नवीद अशरफ  और एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिधू ने पाकिस्तान की जनता को बधाई दी। सैन्य नेतृत्व ने कहा कि “यौम-ए-तकबीर” पाकिस्तान की रक्षा क्षमता, वैज्ञानिक उपलब्धि और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।

शहबाज शरीफ का भारत पर बयान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस अवसर पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि 1998 में भारत ने “युद्धोन्माद और विस्तारवाद” की नीति अपनाई थी, जिसका पाकिस्तान ने “समझदारी, मजबूत संकल्प और समय पर कार्रवाई” के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपने परमाणु कार्यक्रम के जरिए क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने की कोशिश की थी।

चागाई बना पाकिस्तान की परमाणु पहचान

बलूचिस्तान का चागाई जिला पाकिस्तान के परमाणु इतिहास में विशेष स्थान रखता है। यहां स्थित रस कोह पहाड़ियों में किए गए परीक्षणों के बाद पूरे इलाके की तस्वीरें दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी थीं।परमाणु परीक्षण के बाद पाकिस्तान आधिकारिक रूप से दुनिया की सातवीं परमाणु शक्ति बना था।

दक्षिण एशिया में परमाणु प्रतिस्पर्धा

 1998 के बाद दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ी। दोनों देशों ने अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को लगातार मजबूत किया। इसके बाद कारगिल युद्ध, सीमा तनाव और कई सैन्य संकटों के दौरान परमाणु हथियारों को लेकर वैश्विक चिंता भी बढ़ी। 1998 में भारत और पाकिस्तान दोनों के परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। क्षेत्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक कारणों से दोनों देशों के साथ रिश्ते सामान्य होते गए।

पाकिस्तान में राष्ट्रीय उत्सव

“यौम-ए-तकबीर” के अवसर पर पाकिस्तान में सरकारी इमारतों पर रोशनी की गई, सोशल मीडिया पर विशेष अभियान चलाए गए और टीवी चैनलों पर विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए गए।
पाकिस्तानी मीडिया ने इसे राष्ट्रीय गौरव और सैन्य ताकत के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।

भारत-पाक संबंध तनावपूर्ण

 भारत और पाकिस्तान के बीच आज भी सुरक्षा और कश्मीर जैसे मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। ऐसे में दोनों देशों की परमाणु क्षमता दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति में अहम भूमिका निभाती रहती है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों की मौजूदगी दक्षिण एशिया में बड़े युद्ध को रोकने का एक कारण भी रही है, लेकिन साथ ही किसी भी सैन्य तनाव के दौरान जोखिम भी बढ़ा देती है। इसी वजह से भारत और पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम आज भी वैश्विक रणनीतिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।
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