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नैनो यूरिया से धान की फसल में बेहतर उत्पादन
नैनो यूरिया से धान की फसल में बेहतर उत्पादन
राज्य सरकार

उत्पादन : नैनो उर्वरकों से किसान को मिला बेहतर उत्पादन, लागत में आई कमी

ग्राम कोसरंगी के प्रगतिशील किसान भूषण साहू ने अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया प्लस का उपयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं। कृषि विभाग और इफको महासमुंद के सहयोग से किए गए डेमोंस्ट्रेशन के बाद उन्होंने पाया कि इन तरल उर्वरकों से फसल स्वस्थ रही और उत्पादन पारंपरिक खेती के समान रहा, जबकि दानेदार खाद की खपत में कमी आई।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 01 Jun 2026, 01:28 PM · अपडेट: 09 Sep 2026, 12:47 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

जिला अंतर्गत ग्राम कोसरंगी के प्रगतिशील किसान भूषण साहू ने अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी से बीजोपचार तथा फसल वृद्धि के दौरान नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं। नैनो उत्पादों के प्रयोग से फसल का विकास अच्छा हुआ और पौधे अधिक स्वस्थ दिखाई दिए।

किसान भूषण साहू ने बताया कि गत वर्ष खरीफ 2024 में कृषि विभाग एवं इफको महासमुंद के क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा उनके खेत में नैनो यूरिया डेमोंस्ट्रेशन के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इस प्रयोग में पारंपरिक खेती की तुलना में पौधे थोड़े कम हरे दिखाई दिए, लेकिन वे पूरी तरह स्वस्थ थे। जब उत्पादन की तुलना की गई तो नैनो यूरिया उपयोग किए गए खेत और पारंपरिक खेती दोनों का उत्पादन लगभग समान पाया गया।

नैनो डीएपी से बीज उपचार में मिला सफलता का अनुभव

रबी 2024 में नैनो डीएपी से बीज उपचार कर धान के खेत में डेमोंस्ट्रेशन किया गया। लगभग 30–35 दिन बाद 500 एमएल प्रति एकड़ की दर से नैनो डीएपी का छिड़काव भी किया गया। इसमें दानेदार डीएपी का उपयोग पारंपरिक खेती की तुलना में लगभग 50% कम किया गया, फिर भी उत्पादन बराबर रहा। इस सफल प्रयोग के बाद किसान भूषण साहू अपने खेतों में लगातार नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी (तरल खाद) का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब दानेदार खाद की मात्रा लगभग 30% तक कम कर दी गई है, जिससे लागत में भी कमी आई है और उत्पादन स्थिर बना हुआ है।

किसान का अनुभव और सुझाव

किसान भूषण साहू ने कहा,
“नैनो डीएपी और नैनो यूरिया प्लस के उपयोग से कम लागत में बेहतर उत्पादन मिला है। यह तकनीक किसानों के लिए लाभकारी और भविष्य की खेती के लिए उपयोगी है।”
कृषि विभाग ने इस वर्ष खाद आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए किसानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक तरल खाद जैसे नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी का उपयोग करें, ताकि दानेदार उर्वरकों की कमी की पूर्ति हो सके और उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
महासमुंद जिले में खाद की खपत के अनुसार नैनो डीएपी 500 एमएल की 74,000 बोतल तथा नैनो यूरिया 500 एमएल की 30,250 बोतल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

नैनो उर्वरक उपयोग की विधि

बीज उपचार:
1 किलो बीज में 5 एमएल नैनो डीएपी घोल मिलाकर अच्छे से मिश्रण करें। इसके बाद 20 मिनट तक छांव में सुखाकर बोवाई करें।
थरहा उपचार:
1 लीटर पानी में 5 एमएल नैनो डीएपी मिलाकर घोल तैयार करें। रोपाई से पहले थरहा को 20 मिनट तक इस घोल में डुबोकर रखें और फिर रोपाई करें।
फसल पर छिड़काव:
30–35 दिन की फसल पर (जब पत्तियां अच्छी तरह आ जाएं) 1 लीटर पानी में 4–5 एमएल नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस मिलाकर स्प्रे करें।
दूसरा छिड़काव:
पहले छिड़काव के 25–30 दिन बाद, फूल आने से पहले 1 लीटर पानी में 4–5 एमएल नैनो यूरिया प्लस मिलाकर पत्तियों पर स्प्रे करें।
महत्वपूर्ण निर्देश:
नैनो उर्वरकों को कीटनाशकों के साथ मिलाकर भी स्प्रे किया जा सकता है, लेकिन कॉपर आधारित कीटनाशक एवं फफूंदनाशक के साथ न मिलाएं।
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