Raipur News: राजधानी रायपुर के बूढ़ापारा इलाके में पुराने मकान को तोड़ने के दौरान उसका एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। घटना के बाद सड़क पर मलबा फैल गया, जिससे आसपास के कई रास्तों पर आवागमन प्रभावित हुआ। वहीं, 50 से ज्यादा घरों की बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मकान तोड़ने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए हैं। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी
घटना के बाद इलाके के रहवासियों ने नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मकान तोड़ने के काम में लगे मजदूर और ठेकेदार घटना के बाद मौके से चले गए। लोगों ने सवाल उठाया कि जब घनी आबादी वाले इलाके में पुराने मकान को तोड़ा जा रहा था, तो सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए। हालांकि, इस संबंध में जिम्मेदार पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।
रायपुर में 150 से ज्यादा जर्जर भवन चिह्नित
राजधानी में पुराने और जर्जर मकानों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, शहर में 150 से ज्यादा जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे। इनमें 35 से अधिक भवन अति जर्जर श्रेणी में हैं, जिन्हें तत्काल हटाए जाने की जरूरत बताई गई है। ऐसे भवनों के आसपास रहने वाले लोगों और वहां से गुजरने वालों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।नोटिस और जुर्माने तक सीमित कार्रवाई पर सवाल
जर्जर भवनों को लेकर नगर निगम की कार्रवाई अब तक मुख्य रूप से नोटिस जारी करने, जुर्माना लगाने और भवन मालिकों को अपने खर्च पर मकान हटाने के निर्देश देने तक सीमित रही है। सवाल यह है कि यदि किसी भवन का मालिक नोटिस मिलने के बाद भी उसे नहीं हटाता, तो आगे क्या कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में समय पर निगरानी और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
जर्जर मकान गिराने के लिए बजट नहीं होने की दलील
नगर निगम के अधिकारियों की ओर से पहले यह बात कही जा चुकी है कि जर्जर भवनों को गिराने के लिए अलग से बजट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में भवन मालिकों पर ही मकान हटाने की जिम्मेदारी डाली जाती है। लेकिन बूढ़ापारा की घटना के बाद यह सवाल फिर उठ रहा है कि यदि कोई भवन लोगों के लिए खतरा बन चुका है और मालिक उसे नहीं हटाता, तो उसे सुरक्षित तरीके से हटाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा।जर्जर भवनों पर समय रहते कार्रवाई की जरूरत
राजधानी में जर्जर मकानों की समस्या का समाधान केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नगर निगम को चिह्नित भवनों की स्थिति की दोबारा समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर खतरनाक मकानों को हटाने की व्यवस्था करनी होगी। खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में ध्वस्तीकरण के दौरान बैरिकेडिंग, यातायात नियंत्रण और बिजली सुरक्षा जैसे इंतजाम जरूरी हैं।







