पश्चिम बंगाल के राजनीतिक पटल से इस वक्त की सबसे बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा आंतरिक अंतर्विरोध अब पूर्ण रूप से सतह पर आ चुका है। एक अत्यंत अप्रत्याशित घटनाक्रम में, टीएमसी के एक और वरिष्ठ राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने अपने पद से आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है।
गौर करने वाली बात यह है कि बीते मात्र एक सप्ताह के भीतर उच्च सदन से पार्टी का साथ छोड़ने वाले वे तीसरे सांसद बन गए हैं। इसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक वर्चस्व और पार्टी के सांगठनिक ढांचे पर एक अत्यंत गंभीर आघात के रूप में देखा जा रहा है।
सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव जैसे दिग्गज राजनेताओं के क्रमिक इस्तीफों से उपजे स्तब्धकारी माहौल के बीच, अब प्रकाश चिक बड़ाइक के इस निर्णय ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को गहरे असमंजस में डाल दिया है। इस विखंडन का सीधा असर देश के उच्च सदन (राज्यसभा) में पार्टी की शक्ति पर पड़ेगा, जहाँ अब टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 10 रह गई है।
सत्ता परिवर्तन के बाद सांगठनिक बिखराव
उपराष्ट्रपति को प्रेषित किया त्यागपत्र
सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से भेंट कर उन्हें अपना त्यागपत्र सौंप दिया। अपने आधिकारिक पत्र में उन्होंने अत्यंत संक्षिप्त और स्पष्ट शब्दों में लिखा:
"मैं राज्यसभा की सदस्यता से अपना त्यागपत्र दे रहा हूँ, जिसे कृपया तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने की कृपा करें।"
इसके साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सदन के संचालन में मिले अनुकरणीय सहयोग के लिए माननीय सभापति और राज्यसभा सचिवालय के प्रति शिष्टाचारवश आभार भी व्यक्त किया।
चुनावी पृष्ठभूमि और राजनीतिक कद
उल्लेखनीय है कि प्रकाश चिक बड़ाइक बंगाल की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अलीपुरद्वार सीट से टीएमसी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं और क्षेत्र के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। उनके चुनावी हलफनामे के विवरण के अनुसार, बड़ाइक कुल 24.5 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति के स्वामी हैं तथा उन पर किसी भी प्रकार की वित्तीय देनदारी या ऋण नहीं है। उनकी वार्षिक आय लगभग 8.9 लाख रुपये दर्ज है।
वर्तमान परिदृश्य में, प्रकाश चिक बड़ाइक के इस अचानक और कड़े कदम ने न केवल तृणमूल कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी है, बल्कि संपूर्ण पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक नए और अनिश्चित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
