मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मुरैना के बाद अब शिवपुरी जिले से भी ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण परिजनों को गर्भवती महिला को बाइक से अस्पताल ले जाना पड़ा। लेकिन रास्ते में प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद भारी बारिश के बीच सड़क किनारे ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया।
तहसीलदार ने दिखाई मानवता
इस मुश्किल समय में बैराड़ तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मदद का हाथ बढ़ाया। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और बिना देरी किए जच्चा और नवजात को अपनी सरकारी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। समय पर मदद मिलने से मां और बच्चे की जान बच सकी। तहसीलदार के इस कार्य की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
जानकारी के अनुसार, राजपुरा के टपरा गांव निवासी संजू आदिवासी को बुधवार शाम अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई।
अचानक शुरू हुई प्रसव पीड़ा
परिजनों ने तुरंत 108 जननी एक्सप्रेस और एंबुलेंस के लिए संपर्क किया, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी मदद नहीं पहुंची। एंबुलेंस नहीं आने पर परिजनों ने मजबूरी में गर्भवती महिला को बाइक पर बैठाया और बैराड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना हो गए। इस दौरान तेज बारिश हो रही थी और रास्ता भी काफी मुश्किल था। कुछ दूर पहुंचने के बाद महिला की प्रसव पीड़ा अचानक बढ़ गई, जिसके बाद बाइक रोकनी पड़ी।बारिश में सड़क किनारे जन्मा बच्चा
रास्ते में कोई सुरक्षित स्थान नहीं मिलने के कारण महिला ने खुले आसमान के नीचे ही बच्चे को जन्म दिया। तेज बारिश के बीच हुए प्रसव से परिजन परेशान हो गए। इसी दौरान वहां से गुजर रहे बैराड़ निवासी धीरज ओझा की नजर महिला और उसके परिवार पर पड़ी।
तहसीलदार को दी गई जानकारी
धीरज ओझा ने तुरंत बैराड़ तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैस को फोन कर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही तहसीलदार बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। तहसीलदार ने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय अपनी सरकारी गाड़ी से महिला और नवजात को अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया। उन्होंने खुद जच्चा और बच्चे को बैराड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां दोनों का इलाज किया गया। फिलहाल मां और बच्चा सुरक्षित बताए जा रहे हैं