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अखिलेश यादव पर मायावती का पलटवार
अखिलेश यादव पर मायावती का पलटवार
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अखिलेश के ‘चवन्नी से रुपया’ बयान पर मायावती का पलटवार, बोलीं- जाट समाज से माफी मांगें सपा प्रमुख

अखिलेश यादव के आरएलडी को लेकर दिए ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान पर मायावती ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने बयान को अमर्यादित बताते हुए अखिलेश से जाट समाज और चौधरी चरण सिंह के परिवार से माफी मांगने की मांग की। साथ ही सपा की गठबंधन राजनीति और PDA फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए।

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प्रकाशित: 22 Aug 2026, 01:35 PM · अपडेट: 15 Oct 2026, 10:43 PM
उत्तर प्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) और उसके नेता को लेकर दिए गए बयान पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने अखिलेश यादव की टिप्पणी को अमर्यादित, अहंकारी और शर्मनाक बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी दल, नेता या समाज को लेकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने अखिलेश यादव से जाट समाज और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार से माफी मांगने की मांग की है।

चवन्नी से रुपया’ बयान पर भड़कीं मायावती

मायावती ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव के कथित बयान, “हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया”, पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी सहयोगी या पूर्व सहयोगी दल के नेता को लेकर इस तरह की टिप्पणी राजनीतिक अहंकार को दर्शाती है। बसपा प्रमुख के मुताबिक लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप हो सकते हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक संबंध बदलने के बाद पुराने सहयोगियों के प्रति अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुकूल नहीं है।

परिवार के अपमान का लगाया आरोप

बसपा प्रमुख ने कहा कि यह मामला केवल आरएलडी या उसके किसी एक नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के परिवार तथा उनके समर्थकों की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। मायावती ने कहा कि चौधरी चरण सिंह का देश और विशेष रूप से किसानों की राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में उनके परिवार या उससे जुड़े राजनीतिक नेतृत्व को लेकर अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

रवैये पर मायावती ने उठाए सवाल

मायावती ने समाजवादी पार्टी की राजनीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का राजनीतिक रवैया केवल विरोधी दलों के प्रति ही नहीं, बल्कि कई बार अपने सहयोगियों के प्रति भी संकीर्ण रहा है। बसपा प्रमुख ने कहा कि गठबंधन की राजनीति आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर चलती है। यदि सहयोगी दलों को बराबरी और सम्मान नहीं मिले तो राजनीतिक गठबंधन लंबे समय तक कायम नहीं रह सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा जरूरत के समय दूसरे दलों को साथ लेती है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां बदलने पर उन्हीं दलों और नेताओं के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर देती है।

1993 के सपा-बसपा गठबंधन का जिक्र

मायावती ने उत्तर प्रदेश की पुरानी राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए 1993 के सपा-बसपा गठबंधन की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस दौर में दोनों दल साथ आए थे, लेकिन यह राजनीतिक साझेदारी ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। इसके साथ ही उन्होंने 1995 के चर्चित लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र किया। मायावती ने इन घटनाओं के जरिए सपा की गठबंधन राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि बसपा पूर्व में भी इस तरह के राजनीतिक अनुभवों से गुजर चुकी है।

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