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Key facts have come to light in the FIR
Key facts have come to light in the FIR
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Saty Niketan: किराए के लालच में चार मंजिलें बनाने का खुलासा, FIR में बड़े तथ्य आए सामने

Saty Niketan: हादसे की FIR में बड़ा खुलासा हुआ है। किराए के लालच में चार मंजिलें बना दी गईं, जिसके बाद एम्स और एमसीडी ने कड़े कदम उठाने शुरू किए हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 08 Sep 2026, 12:31 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 10:29 AM
दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

Saty Niketan: राजधानी के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक इमारत हादसे में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाली परतें खुलती जा रही हैं। दर्ज हुई एफआईआर (FIR) से साफ हुआ है कि यह महज एक इत्तेफाक या दुर्घटना नहीं, बल्कि ज्यादा किराए की हवस में बोया गया लापरवाही का बीज था। मकान मालिक ने ज्यादा कमाई के चक्कर में सुरक्षा मानकों और निर्माण नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया था।

नियमों की धज्जियां उड़ाकर बना दीं चार अतिरिक्त मंजिलें

शुरुआती जांच और पुलिस के दस्तावेजों के मुताबिक, मूल ढांचे पर बिना किसी अनुमति के चार-चार अतिरिक्त मंजिलें खड़ी कर दी गई थीं। कमजोर नींव और ढाँचे पर लगातार बढ़ते भारी वजन को इमारत का बेस बर्दाश्त नहीं कर सका। आखिरकार वही हुआ जिसका डर था—पूरी की पूरी इमारत भरभराकर ताश के पत्तों की तरह ढह गई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह के अवैध निर्माण धड़ल्ले से चल रहे हैं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं था।

"नल से पानी बहने जैसी आवाज आई और सब ढह गया"

इस हादसे में किसी तरह जिंदा बाहर निकाले गए नितेश ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि संभलने का मौका तक नहीं मिला। नितेश के मुताबिक, "हादसे से ठीक एक पल पहले दीवार के अंदर से नल से तेज पानी बहने या सीपेज जैसी आवाज आई थी। हम कुछ समझ पाते, उससे पहले ही छत और दीवारें हमारे ऊपर आ गिरीं।"

इस खौफनाक घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) बैकफुट पर है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी दिल्ली में इस तरह की खतरनाक और अवैध इमारतों की पहचान के लिए सघन सर्वे के आदेश दिए हैं। साथ ही, संबंधित अधिकारियों से तीन दिनों के भीतर पूरी विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।

28 लाख में से 9 लाख इमारतों का हिसाब गायब

प्रशासनिक आंकड़ों ने सरकारी विभागों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालिया सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में दर्ज कुल 28 लाख इमारतों या संपत्तियों में से सिर्फ 19 लाख का ही आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है। यानी करीब 9 लाख ढांचे ऐसे हैं जो बिना किसी पुख्ता दस्तावेज या मंजूरी के खड़े हैं या चल रहे हैं।

हादसे के बाद अब प्रशासन नींद से जागा है और सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज करने वालों पर शिकंजा कसने का दावा कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले मकान मालिकों और अवैध निर्माण को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ आने वाले दिनों में और सख्त बुलडोजर व सीलिंग की कार्रवाई देखने को मिलेगी।

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