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लू के बीच स्कूल खुलते ही बच्चों की परेशानी
लू के बीच स्कूल खुलते ही बच्चों की परेशानी
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स्कूल : हाहाकारी गर्मी के बीच कल से खुल रहे स्कूल,  पालकों ने खोला मोर्चा  

छत्तीसगढ़ में नौतपा बीत जाने के बाद भी सूर्य का प्रकोप थमा नहीं है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है और दोपहर के समय जानलेवा लू चल रही है। इस असहनीय मौसम के बीच, राज्य सरकार के पूर्व-निर्धारित कैलेंडर के अनुसार 16 जून (मंगलवार) से सभी सरकारी और निजी स्कूल खोले जा रहे हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 15 Jun 2026, 05:31 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 08:04 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ में नौतपा बीत जाने के बाद भी सूरज के तेवर ठंडे नहीं हुए हैं। प्रदेश के कई जिलों में पारा अभी भी 42 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है, और गर्म हवाओं (लू) के थपेड़ों से जनजीवन बेहाल है। इस भीषण मौसमी आपदा के बीच, सरकारी निर्देशानुसार 16 जून (मंगलवार) से नए शैक्षणिक सत्र के लिए स्कूल खोले जा रहे हैं। एक तरफ जहां आसमान से आग बरस रही है, वहीं दूसरी तरफ नौनिहालों को स्कूल भेजने के फरमान ने प्रदेशभर के अभिभावकों की रातों की नींद उड़ा दी है।

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ स्वास्थ्य विभाग अपनी आधिकारिक एडवाइजरी में साफ कह चुका है कि छोटे बच्चे लू और हीट स्ट्रोक के सबसे आसान शिकार होते हैं, इसलिए उन्हें दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने दिया जाए। 

7. सरकार के फैसले पर यक्ष प्रश्न

जैसे-जैसे 16 जून की तारीख नजदीक आ रही है, पूरे प्रदेश के पारिवारिक माहौल में तनाव, चिंता और डर साफ देखा जा सकता है। अब जनता सरकार से कुछ सीधे और तीखे सवाल पूछ रही है

  • क्या सरकार ने स्कूल खोलने से पहले सभी ग्रामीण और शहरी स्कूलों में ठंडे पेयजल और बिजली की गारंटी ली है

  • स्वास्थ्य विभाग की लू की गंभीर चेतावनियों को दरकिनार करना कितना तर्कसंगत है?

  • क्या बच्चों की हाजिरी, उनकी अनमोल जिंदगी से ज्यादा जरूरी है

बुनियादी सुविधाओं का रोना

जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश के सैकड़ों सरकारी स्कूलों में आज भी बिजली का कनेक्शन तक नहीं है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में घंटों-घंटों की अघोषित बिजली कटौती आम बात हो चुकी है। कई स्कूलों की स्थिति तो इतनी बदतर है कि वहां छत के पंखे तक नसीब नहीं हैं; कूलर और एसी की बात तो बहुत दूर है। अभिभावक बेहद आक्रोश में पूछ रहे हैं कि—"जिस कड़कड़ाती गर्मी में घरों के कूलर-एसी फेल हो रहे हैं, वहां बिना पंखे के टीन-टप्पर और कंक्रीट की भट्ठी जैसे क्लासरूम में बच्चे कैसे पढ़ाई करेंगे

बच्चे बीमार हुए तो ज़िम्मेदार कौन

सरकार के इस फैसले के खिलाफ 'छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन' ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह फैसला बच्चों को शिक्षा देने का नहीं, बल्कि उनकी जान को सीधे खतरे में डालने जैसा है। पैरेंट्स ने तीखे सवाल दागते हुए पूछा है कि—"अगर इस जानलेवा गर्मी के कारण किसी बच्चे को कुछ हो जाता है या कोई अप्रिय घटना घटती है, तो क्या मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री इसकी लिखित जिम्मेदारी लेंगे?"

5. शिक्षाविदों और प्राइवेट स्कूल

सिर्फ अभिभावक ही नहीं, बल्कि शिक्षा जगत के विशेषज्ञ और निजी स्कूल संगठन भी इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए हैं। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार को व्यावहारिक होना चाहिए। पहले सभी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं (बिजली, पंखे, ठंडा पानी) सुनिश्चित की जानी चाहिए, उसके बाद ही स्कूल खोलने का आदेश जारी होना चाहिए था। वहीं, अन्य शिक्षाविदों का मानना है कि जून के आखिरी हफ्ते तक या मौसम सामान्य होने तक स्कूलों को हर हाल में बंद रखा जाना चाहिए था।

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