सेना का गुप्त कदम : म्यांमार सीमा के पास नई छावनी और सैन्य ठिकाना बनाने की तैयारी
बांग्लादेश ने म्यांमार सीमा से लगे नाइखोंगछारी क्षेत्र में नई सैन्य छावनी और सप्लाई बेस विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह इलाका बांग्लादेश, म्यांमार और भारत के त्रि-जंक्शन के करीब है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत बढ़ जाती है। सेना ने जमीन की घेराबंदी और सीमांकन का काम शुरू कर दिया है, वहीं आधुनिक हथियारों की संभावित तैनाती को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।
बांग्लादेश-म्यांमार सीमा के रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके नाइखोंगछारी में बांग्लादेशी सेना एक नई सैन्य छावनी (कैंटोनमेंट) स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इस इलाके में लंबे समय से भारी हथियारों से लैस रोहिंग्या विद्रोहियों की मौजूदगी रही है, जिससे सुरक्षा तंत्र काफी सतर्क है। 'नॉर्थईस्ट न्यूज' द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सेना ने प्रस्तावित क्षेत्र की घेराबंदी और ज़मीन का सीमांकन करने के लिए लाल झंडे लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कैंटोनमेंट से जुड़े मुख्य पहलू
रणनीतिक स्थिति: यह नई छावनी कॉक्स बाज़ार जिले में स्थित रामू के पास बनाई जा रही है, जो बांग्लादेश सेना की 10वीं इन्फैंट्री डिवीज़न का मुख्य मुख्यालय है।
त्रिकोणीय सीमा के करीब: बांदरबन जिले का आखिरी गाँव 'केओकराडोंग' बांग्लादेश, म्यांमार और भारत के त्रि-जंक्शन (मिलन बिंदु) के बेहद करीब स्थित है। इसके ठीक दूसरी तरफ भारत के मिज़ोरम का डुडुक्सोरा इलाका और BSF यूनिट वाला परवा क्षेत्र पड़ता है।
सप्लाई बेस और ज़मीन समतल करने का काम: टेकनाफ के उत्तर और नाइखोंगछारी के पास 'सिलखाली' में ज़मीन को समतल करने और झाड़ियों को साफ करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। इस जगह को एक प्रमुख सप्लाई बेस के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
सप्लाई बेस के सथ को हरी झंडी
फरवरी 2025 में बांग्लादेश के थल सेनाध्यक्ष जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने खुद सिलखाली और उसके आसपास के रणनीतिक क्षेत्रों का जायज़ा लिया था और इस प्रस्तावित सप्लाई बेस के स्थान को हरी झंडी दी थी। सिलखाली बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा एक छोटा तटीय राजस्व गाँव है, जो टेकनाफ से लगभग 30 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। बांग्लादेश सेना फिलहाल यहाँ तुर्की-निर्मित फील्ड गन, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों, मोर्टार और छोटे हथियारों के साथ एक फील्ड फायरिंग रेंज संचालित कर रही है।
आधुनिक घातक हथियारों की तैनाती
खबरें हैं कि बांग्लादेश, तुर्की से नए कॉम्बैट ड्रोन और एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीद रहा है। ऐसे में रक्षा विश्लेषकों के बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या इस नए सीमावर्ती ठिकाने पर तुर्की के आधुनिक घातक हथियारों की तैनाती की जाएगी? इस सीमावर्ती इलाके में बांग्लादेशी सेना की बढ़ती हलचल और नए छावनी निर्माण से पूरे क्षेत्र में कूटनीतिक और सामरिक हलचल बढ़ गई है।