Service Sector Growth: अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत तेज रफ्तार के साथ की है। अप्रैल-जून तिमाही में देश की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8% रही है। यह पिछले साल की इसी तिमाही में दर्ज 6.9% की वृद्धि से ज्यादा है और भारतीय रिजर्व बैंक के 7% अनुमान को भी पीछे छोड़ती है।
आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही में वास्तविक GDP ₹81.36 लाख करोड़ आंकी गई है। वहीं मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल GDP 10.3% बढ़कर ₹88.27 लाख करोड़ रही। अर्थव्यवस्था की इस रफ्तार में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की अहम भूमिका रही है।
निवेश और घरेलू खपत से मिला सहारा
अर्थव्यवस्था के लिए सबसे अहम संकेत निवेश और घरेलू मांग से मिले हैं। पहली तिमाही में सकल स्थिर पूंजी निर्माण यानी निवेश में 11.9% की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं निजी अंतिम उपभोग व्यय 7.1% बढ़ा है। इससे संकेत मिलता है कि देश में निवेश के साथ घरेलू मांग भी आर्थिक गतिविधियों को गति दे रही है।
सेवा क्षेत्र की रफ्तार तेज, 12.1% की बढ़त
आगे भी चुनौतियां बरकरार
GDP के मजबूत आंकड़ों के बावजूद अर्थव्यवस्था के सामने कुछ जोखिम बने हुए हैं। खासकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव भारत के लिए चिंता का विषय हैं। महंगा तेल आयात बिल बढ़ाने के साथ महंगाई पर भी दबाव डाल सकता है।
फिलहाल 7.8% की GDP वृद्धि ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत को उम्मीदों से बेहतर बनाया है। सरकार के मुताबिक घरेलू मांग, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां इस आर्थिक गति के प्रमुख आधार बने हुए हैं।
