शादी पर रोक : गाजे-बाजे के साथ आ गई बारात, फिर पहुंची पुलिस और रुक गई नाबालिगों की शादी
छत्तीसगढ़ के कोरबा में 13 साल की नाबालिग लड़की और 15 साल के लड़के की शादी कराई जा रही थी। सूचना मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बाल विवाह को रुकवा दिया। टीम ने दोनों परिवारों को कानून की जानकारी देकर जागरूक किया।
कीर्तिमान डेस्क
20 Jul 2026, 01:23 PM
कोरबा
छत्तीसगढ़ में बाल विवाह का मामला सामने आया है। यहां 13 साल की लड़की और 15 साल के लड़के की शादी हो रही थी। शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, घर में मंडप सज चुका था और रिश्तेदारों की मौजूदगी में विवाह की रस्में शुरू होने वाली थीं। इसी बीच महिला एवं बाल विकास विभाग और मानिकपुर चौकी पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और समय रहते बाल विवाह को रुकवा दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद शादी समारोह में मौजूद लोगों के बीच हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर नाबालिगों की शादी के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और परिजनों को भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने की सलाह दी।
पसंद बनी शादी की वजह
जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला कोरबा के चिमनीभठा वार्ड नंबर 14 का है। यहां रहने वाला 15 वर्षीय नाबालिग लड़का और 13 वर्षीय लड़की एक-दूसरे को पसंद करते थे। दोनों के बीच पसंद और शादी करने की इच्छा को देखते हुए परिजनों ने उनकी शादी कराने का फैसला कर लिया। बताया जा रहा है कि परिवार वालों ने सामाजिक परंपराओं के अनुसार विवाह की तैयारी शुरू कर दी थी। घर में शादी का माहौल था, मंडप सजाया गया था और रिश्तेदारों के साथ-साथ मेहमान भी पहुंच चुके थे। बारात भी घर के दरवाजे तक आ गई थी।
मौके पर पहुंची पुलिस टीम
बाल विवाह की सूचना पर एक्शन
शादी समारोह के दौरान किसी जागरूक व्यक्ति ने इसकी सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग को दे दी। जानकारी मिलते ही विभाग की टीम ने मामले को गंभीरता से लिया और मानिकपुर चौकी पुलिस को साथ लेकर तत्काल मौके पर पहुंच गई।
टीम के पहुंचते ही विवाह स्थल पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की और दोनों नाबालिगों की उम्र की जानकारी ली। जांच में बाल विवाह की पुष्टि होने के बाद टीम ने तत्काल विवाह की प्रक्रिया को रुकवा दिया।
परिवारों को दी गई समझाइश
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम मौके पर पहुंची। दोनों परिवारों को बाल विवाह कानून की जानकारी दी गई।अधिकारियों ने बताया कि कम उम्र में विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। टीम की समझाइश और कानूनी कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद दोनों परिवार शादी रोकने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद नाबालिग लड़का और लड़की अपने-अपने घर वापस चले गए।
बाल विवाह रोकने पहुंची टीम
आंगनबाड़ी की लापरवाही पर सवाल
इस मामले में सबसे बड़ी हैरानी की बात यह रही कि जिस इलाके में यह विवाह होने जा रहा था, वहां तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को इसकी जानकारी तक नहीं मिल सकी। जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत बाल विवाह रोकने और लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी भी स्थानीय स्तर पर होती है। घटना सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी इस बात की समीक्षा की जा रही है कि आखिर इतनी बड़ी तैयारी के बावजूद स्थानीय अमले को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
समय पर पहुंची टीम, रुकी शादी
महिला एवं बाल विकास अधिकारी बसंत मिंज ने बताया कि बाल विवाह की सूचना मिलने के बाद विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची थी। टीम ने पुलिस की मदद से विवाह को रुकवाया और दोनों परिवारों को कानून के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया गया। उन्होंने कहा कि जिले में बाल विवाह रोकने के लिए विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और लोगों से अपील की जा रही है कि बच्चों की कम उम्र में शादी न करें।