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मर्चेंट नेवी अधिकारी रुद्रांश चौबे घर लौटे
मर्चेंट नेवी अधिकारी रुद्रांश चौबे घर लौटे
रायपुर

जंग का साया : 22 क्रू मेंबर्स के साथ 90 दिन तक खतरे में रहा रायपुर का युवक

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते सैन्य खतरे के बीच रायपुर के मर्चेंट नेवी अधिकारी रुद्रांश चौबे लगभग 90 दिनों तक अपने जहाज के साथ फंसे रहे। 32 हजार मीट्रिक टन यूरिया लेकर भारत लौट रहे जहाज पर तैनात रुद्रांश ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों के साए में समय बिताया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 12 Jun 2026, 11:22 AM · अपडेट: 14 Jun 2026, 09:14 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच तीन महीने तक समुद्र में फंसा रहा जहाज, सुरक्षित लौटे रुद्रांश चौबे ने सुनाई युद्ध क्षेत्र की भयावह कहानी मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव का असर अब वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद क्षेत्र में फिर से हमलों का दौर शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ गया है। विशेष रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

90 दिन तक झेला खौफ

इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का एक युवक भी युद्ध की विभीषिका के बीच समुद्र में फंस गया था। मर्चेंट नेवी में कार्यरत रुद्रांश चौबे लगभग तीन महीनों तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अपने जहाज के साथ फंसे रहे। लगातार मिसाइल हमलों और ड्रोन गतिविधियों के बीच उन्होंने और उनके साथियों ने हर दिन अनिश्चितता और डर के माहौल में बिताया। हाल ही में सुरक्षित रायपुर लौटने पर परिवार और परिचितों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। रुद्रांश चौबे ने बताया कि वे एक व्यापारिक मालवाहक जहाज पर तैनात थे, जो लगभग 32 हजार मीट्रिक टन यूरिया लेकर भारत लौट रहा था। जहाज में कुल 22 क्रू सदस्य मौजूद थे। इसी दौरान क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बनने लगी और उनका जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में फंस गया। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव ने जहाज की आवाजाही और सुरक्षा दोनों को प्रभावित किया।

हर पल रहता था मिसाइल 

रुद्रांश के अनुसार, समुद्र के बीच जहाज पर रहते हुए चारों ओर से ड्रोन और मिसाइलों की आवाजें सुनाई देती थीं। कई बार ऐसा लगता था कि अगला निशाना उनका जहाज भी हो सकता है। युद्ध क्षेत्र के बेहद करीब होने के कारण जहाज पर मौजूद सभी क्रू सदस्य मानसिक दबाव और भय में जी रहे थे। रात-दिन सतर्कता बनाए रखना उनकी मजबूरी बन गई थी।

हालांकि रुद्रांश का अपने परिवार से नियमित संपर्क बना हुआ था, लेकिन उन्होंने कभी भी वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी घरवालों को नहीं दी। उनका कहना है कि परिवार पहले ही समाचार चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से क्षेत्र की स्थिति देखकर चिंतित था। ऐसे में यदि वे जहाज पर मौजूद वास्तविक खतरे के बारे में बता देते, तो परिजनों की चिंता और बढ़ जाती। इसलिए हर बातचीत में वे खुद को सुरक्षित बताते रहे।

घर लौटकर सुनाई पूरी आपबीती

करीब 90 दिनों तक खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद जब रुद्रांश सुरक्षित रायपुर पहुंचे तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। घर पहुंचने के बाद उन्होंने अपने माता-पिता और परिजनों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह हर गुजरते दिन के साथ खतरा बढ़ता जा रहा था और आसपास से गुजरने वाली मिसाइलों की आवाज सुनकर दिल दहल जाता था। रुद्रांश की आपबीती सुनकर परिवार के सदस्य भी स्तब्ध रह गए। उन्हें पहली बार यह एहसास हुआ कि बीते तीन महीने उनके बेटे ने किस तरह मौत के साए में बिताए। परिजनों ने रुद्रांश से भविष्य में ऐसे संवेदनशील और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है। वहीं रुद्रांश का सुरक्षित लौटना परिवार के लिए किसी बड़ी राहत और खुशी से कम नहीं है।

वैश्विक तनाव के बीच समुद्री कर्मियों की चुनौतियां बढ़ीं

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वहां कार्यरत हजारों नाविकों पर पड़ रहा है। युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे मर्चेंट नेवी कर्मियों को हर समय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रुद्रांश चौबे की कहानी ऐसे ही हजारों समुद्री कर्मचारियों की चुनौतियों और साहस की जीवंत मिसाल बनकर सामने आई है।

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