Share Market: दो कारोबारी सत्रों तक बढ़त दर्ज करने के बाद भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को फिर बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में दबाव के बीच बैंकिंग और कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी रही, लेकिन ज्यादातर प्रमुख शेयर लाल निशान में बंद हुए। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स बुधवार को 429.11 अंक यानी 0.59 फीसदी की गिरावट के साथ 72,638.70 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स की शुरुआत 72,965.38 के स्तर से हुई थी। दिन के अंत तक इसमें लगातार दबाव बना रहा।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी बुधवार को कमजोरी के साथ बंद हुआ। 50 शेयरों वाला निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 फीसदी टूटकर 22,603.05 पर आ गया। निफ्टी की शुरुआत 22,690.45 के स्तर पर हुई थी।
मंगलवार को बाजार में रही थी जोरदार तेजी
इससे एक दिन पहले यानी 6 अक्टूबर को शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 685.34 अंक यानी 0.95 फीसदी चढ़कर 73,067.81 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 220.35 अंक यानी 0.98 फीसदी की बढ़त के साथ 22,776.10 पर पहुंच गया था। मंगलवार के कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में 21 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए थे, जबकि 9 में गिरावट दर्ज की गई थी। ट्रेंट के शेयर में सबसे ज्यादा 12.78 फीसदी की तेजी रही थी। दूसरी ओर टेक महिंद्रा 2.30 फीसदी की गिरावट के साथ सबसे कमजोर शेयर रहा।
सेंसेक्स के सिर्फ 4 शेयरों में तेजी
बुधवार को सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल 4 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 26 शेयरों में गिरावट रही। कोटक महिंद्रा बैंक सेंसेक्स का सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। इसके अलावा भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस में भी तेजी दर्ज की गई। गिरावट वाले शेयरों में टाइटन सबसे कमजोर रहा। इसके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), एशियन पेंट्स और इन्फोसिस में भी बिकवाली देखने को मिली। इन्फोसिस का शेयर 2.07 फीसदी टूटकर 992.10 रुपये पर बंद हुआ।RBI के रेपो रेट फैसले का बाजार पर असर
बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के फैसले पर भी बाजार की नजर रही। 5 अक्टूबर से शुरू हुई बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के फैसलों की घोषणा की।
रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हुआ
आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया। रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर बैंकिंग सिस्टम में ब्याज दरों पर पड़ सकता है। इससे कर्ज और ईएमआई महंगी होने की संभावना रहती है, जबकि एफडी निवेशकों को अधिक ब्याज मिलने का फायदा हो सकता है।महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर
बाजार में ग्लोबल टेंशन, महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे मुद्दों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ऐसे माहौल में रेपो रेट में बढ़ोतरी को बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना गया। निवेशकों की सतर्कता बढ़ने से बुधवार के कारोबार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर
बुधवार को भारतीय रुपए भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। रुपया 0.4 फीसदी की गिरावट के साथ 96.7750 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 96.4200 के स्तर पर बंद हुआ था।