खास सुविधा : महाकाल के भक्तों को मिलेगा इडली-सांभर का प्रसाद, नई व्यवस्था शुरू
मंदिर अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए नई व्यवस्था शुरू की गई है। अब हर मंगलवार और शुक्रवार को पारंपरिक भोजन के साथ दक्षिण भारतीय व्यंजनों का प्रसाद भी दिया जाएगा। मंगलवार को इडली, सांभर, पोंगल और शुक्रवार को पुलिहरा, रसम, पायसम जैसे व्यंजन परोसे जाएंगे। सावन माह में भक्तों के लिए फलाहारी प्रसाद की भी व्यवस्था की जाएगी।
कीर्तिमान डेस्क
29 Jul 2026, 12:59 PM
मध्य प्रदेश
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा शुरू की गई है। मंदिर के अन्नक्षेत्र में अब पारंपरिक भोजन के साथ दक्षिण भारतीय व्यंजनों का प्रसाद भी उपलब्ध कराया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने मंगलवार से इस नई व्यवस्था की शुरुआत कर दी है। अब सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शुक्रवार को श्रद्धालुओं को विशेष दक्षिण भारतीय भोजन परोसा जाएगा। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और खान-पान की विविधता से जोड़ना है। महाकाल मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में अलग-अलग राज्यों के भोजन को प्रसाद के रूप में शामिल करने से भक्तों को एक नया अनुभव मिलेगा।
विविधता में एकता को मिलेगा बढ़ावा
मंदिर प्रशासन के अनुसार, मध्य प्रदेश के किसी मंदिर अन्नक्षेत्र में पहली बार इस तरह की विशेष पहल की गई है। दक्षिण भारतीय व्यंजनों को शामिल करने का फैसला देश की सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
प्रशासन का मानना है कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की भोजन परंपराएं यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आपस में जोड़ने का माध्यम बन सकती हैं। महाकाल मंदिर में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों को प्रसाद में शामिल करना “विविधता में एकता” की भावना को मजबूत करेगा।
महाकाल अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद ग्रहण की व्यवस्था
मंगलवार और शुक्रवार को बदलेगा अन्नक्षेत्र का मेन्यू
महाकाल मंदिर की उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि अब हर मंगलवार और शुक्रवार को अन्नक्षेत्र में दक्षिण भारतीय भोजन विशेष रूप से तैयार किया जाएगा। मंगलवार के दिन श्रद्धालुओं को इडली, सांभर, स्टीम राइस, पोंगल और मौसमी सब्जी प्रसाद के रूप में परोसी जाएगी। वहीं शुक्रवार को मेन्यू में पुलिहरा, रसम, पायसम, स्टीम राइस और मौसमी सब्जी शामिल रहेगी। इससे पहले अन्नक्षेत्र में नियमित रूप से दाल, रोटी, चावल, सब्जी और मिठाई का प्रसाद दिया जाता था। अब इसमें दक्षिण भारतीय व्यंजनों को भी जोड़ा गया है।
सावन में फलाहारी प्रसाद की भी व्यवस्था
सावन महीने में महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन ने अन्नक्षेत्र में विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। सावन के दौरान आने वाले भक्तों के लिए फलाहारी प्रसाद की व्यवस्था भी की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को भी आसानी से प्रसाद मिल सके। इसके लिए अलग से फलाहारी भोजन तैयार किया जाएगा, जिसमें व्रत के नियमों का ध्यान रखा जाएगा।
भारतीय स्वाद का प्रसाद, मेन्यू में शामिल हुए इडली-सांभर और अन्य व्यंजन।
दक्षिण भारतीय भोजन के लिए विशेष शेफ की नियुक्ति
दक्षिण भारतीय व्यंजनों की गुणवत्ता और पारंपरिक स्वाद बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष शेफ की नियुक्ति की है। यह शेफ अन्नक्षेत्र के कर्मचारियों को दक्षिण भारतीय भोजन तैयार करने का प्रशिक्षण देगा। इसके अलावा दो कर्मचारियों को केवल दक्षिण भारतीय व्यंजन बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और स्वाद को बनाए रखने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
रोज हजारों श्रद्धालु करते हैं अन्नक्षेत्र में भोजन
महाकाल मंदिर के स्मार्ट पार्किंग परिसर में स्थित अन्नक्षेत्र का संचालन श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा किया जाता है। वर्ष 2023 में शुरू किए गए इस दो मंजिला अन्नक्षेत्र भवन में एक समय में करीब 370 श्रद्धालु बैठकर भोजन कर सकते हैं। सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन करीब 9 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। वहीं महाशिवरात्रि, सावन और अन्य बड़े पर्वों के दौरान यह संख्या बढ़कर 12 हजार तक पहुंच जाती है।
आधुनिक सुविधाओं से तैयार होता है भोजन
अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार करने के लिए आधुनिक मशीनों और सुविधाओं का उपयोग किया जाता है। यहां बड़ी मात्रा में प्रतिदिन भोजन बनाया जाता है, जिसके लिए सैकड़ों किलो आटा, चावल, दाल, सब्जियां और अन्य सामग्री का इस्तेमाल होता है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी और महाकाल मंदिर अन्नक्षेत्र देशभर की भोजन परंपराओं का संगम बनेगा।