दुर्ग जिले में निजी स्कूलों द्वारा पालकों पर किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री एक ही तय दुकान से खरीदने का दबाव बनाने की शिकायतों के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की जांच के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया है।
अभिभावकों का आरोप है कि कई निजी स्कूल छात्रों के लिए किताबें, स्कूल ड्रेस और जरूरी सामग्री केवल एक ही फर्म या दुकान से खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इस प्रथा को रोकने के लिए अब समितियां शिकायतों पर स्वतः संज्ञान लेकर जांच और कार्रवाई करेंगी।
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर जिला स्तरीय समिति गठित की गई है। इसमें कलेक्टर अभिजीत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार मिश्रा और राज्य कर विभाग की सहायक आयुक्त रिंकी अखिलेश सोनी को शामिल किया गया है। यह समिति निजी स्कूलों से जुड़ी शिकायतों की निगरानी और जांच करेगी।
ब्लॉक स्तर पर भी बनाए गए जांच दल
विकासखंड स्तर पर भी अलग-अलग जांच समितियां गठित की गई हैं।
- दुर्ग विकासखंड: एसडीएम हरिवंश मिरी, बीईओ विनोद शुक्ला, जीएसटी इंस्पेक्टर गोशिवेंद्र तांडे
- धमधा ब्लॉक: सोनाल डेविड, बीईओ अथर्व शर्मा, नागेंद्र देशमुख
- पाटन ब्लॉक: लवकेश ध्रुव, डालेंद्र देवांगन, ताम्रध्वज साहू
ये टीमें स्थानीय स्तर पर स्कूलों की गतिविधियों की जांच करेंगी।
फीस वृद्धि और अनियमितताओं पर भी नजर
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये समितियां केवल किताब और ड्रेस बिक्री ही नहीं, बल्कि निजी स्कूलों में फीस वृद्धि से जुड़ी शिकायतों पर भी स्वतः संज्ञान ले सकेंगी। कार्रवाई छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक 2020 के तहत की जाएगी। शिकायत दर्ज कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। यदि किसी स्कूल द्वारा तय दुकान से सामग्री खरीदने का दबाव बनाया जाता है या अधिक फीस ली जाती है, तो अभिभावक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए मान्यता कक्ष प्रभारी विपिन गनवीर को जिम्मेदारी दी गई है। शिकायतें व्हाट्सएप और मोबाइल नंबर 909277888 पर भी दर्ज की जा सकती हैं।कड़ी कार्रवाई के संकेत
शिक्षा विभाग ने कहा है कि शिकायत मिलने पर सभी दस्तावेजों की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस कदम से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो हर साल स्कूलों की मनमानी कीमतों और अनिवार्य खरीदारी से परेशान रहते हैं।
