गुजरात की राजनीति से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गज नेता और डेडियापाडा से विधायक चैतर वसावा की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। वनकर्मियों पर हमले और रंगदारी के एक पुराने मामले में कोर्ट ने चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा सहित कुल 9 लोगों को दोषी करार दिया है। राजपीपला की एडिशनल सेशंस कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए विधायक वसावा को 7 साल की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद अब कानूनन उनकी विधानसभा सदस्यता भी खतरे में पड़ती नजर आ रही है।
क्या है यह पूरा विवाद?
यह पूरा मामला करीब ढाई साल पुराना है। अक्टूबर 2023 में वन विभाग की टीम ने नर्मदा जिले में सरकारी वन भूमि पर अवैध रूप से उगाई गई फसलों को हटा दिया था। इसी कार्रवाई के बाद प्रभावित किसानों के मुआवजे और आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए वनकर्मियों को विधायक चैतर वसावा के डेडियापाडा स्थित निजी आवास पर बुलाया गया था।
आरोप है कि बैठक के दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और मारपीट में बदल गई। वनकर्मियों के साथ न सिर्फ बदसलूकी की गई, बल्कि माहौल में खौफ पैदा करने के लिए विधायक द्वारा अपने हथियार से हवा में फायरिंग करने की बात भी सामने आई थी। इतना ही नहीं, अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में यह भी साबित किया कि अगले दिन डरा-धमकाकर वन अधिकारियों से 60,000 रुपये की जबरन वसूली (रंगदारी) भी की गई थी।
हाई-वोल्टेज ड्रामा और सरेंडर
मामला दर्ज होने के बाद चैतर वसावा करीब एक महीने तक पुलिस की गिरफ्त से दूर रहे। हालांकि, पुलिस ने शुरुआत में ही उनकी पत्नी और पीए को दबोच लिया था। जब गुजरात हाई कोर्ट से भी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज हो गई, तो आखिरकार थक-हारकर 14 दिसंबर 2023 को विधायक ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था। बाद में उन्हें नियमित जमानत तो मिल गई, लेकिन कानूनी शिकंजा ढीला नहीं हुआ। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी इस पूरी कार्रवाई को शुरुआत से ही सरकार की एक राजनीतिक साजिश बताती आ रही है।अदालत की कार्रवाई और कानूनी पेंच
नर्मदा जिले के राजपीपला में एडिशनल सेशंस जज ए.वी. हिरपारा की कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहन सुनवाई की। इस दौरान सरकारी वकील ने 17 गवाहों को कोर्ट के सामने पेश कर अपना पक्ष बेहद मजबूती से रखा।
टाइमलाइन पर एक नजर:
2 नवंबर 2023: पुलिस ने दर्ज की एफआईआर।
30 जनवरी 2024: पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट।
7 अगस्त 2025: कोर्ट में तय हुए आरोप।
जून 2026: कोर्ट ने सुनाया 7 साल की सजा का फैसला।
अब आगे क्या होगा?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत अगर किसी मौजूदा सांसद या विधायक को 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी सदन की सदस्यता तुरंत प्रभाव से रद्द होने का प्रावधान है। चूंकि चैतर वसावा को 7 साल की सजा मिली है, इसलिए उनकी विधायकी जाना लगभग तय माना जा रहा है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि वसावा के पास इस फैसले को ऊपरी अदालत (हाई कोर्ट) में चुनौती देने का विकल्प अभी खुला हुआ है। अगर हाई कोर्ट उनकी सजा पर रोक लगा देता है, तभी उनकी विधायकी बच पाएगी। फिलहाल, इस फैसले ने गुजरात में आम आदमी पार्टी की सियासी जमीन को हिलाकर रख दिया है।