मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के जरिए किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। इसी कड़ी में सूक्ष्म सिंचाई योजना किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है। इसके तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों पर अनुदान दिया जा रहा है, जिससे कम पानी में बेहतर उत्पादन संभव हो रहा है।
किसान ने अपनाई ड्रिप सिंचाई तकनीक
सरगुजा जिले के विकासखंड लुण्ड्रा अंतर्गत ग्राम पंचायत झेराडीह के प्रगतिशील किसान आनंद राम पैकरा ने सूक्ष्म सिंचाई योजना का लाभ लेकर अपनी खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ा है। उनके पास कुल 0.909 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें 0.509 हेक्टेयर में धान और 0.400 हेक्टेयर में टमाटर व गोभी जैसी सब्जियों की खेती की जाती है। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की, जिसके लिए उन्हें शासन से 55 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ।
पानी, समय और श्रम की हुई बचत
आनंद राम पैकरा ने बताया कि पारंपरिक सिंचाई पद्धति में अधिक पानी, समय और मेहनत लगती थी। साथ ही खेत में समान रूप से सिंचाई करना भी मुश्किल होता था। ड्रिप सिंचाई अपनाने के बाद पानी सीधे पौधों की जड़ों तक आवश्यक मात्रा में पहुंच रहा है, जिससे जल की बचत के साथ पौधों का विकास भी बेहतर हुआ है। फसल की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है।उर्वरक उपयोग से बढ़ा उत्पादन
किसान ने बताया कि ड्रिप प्रणाली से उर्वरकों का उपयोग भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा रहा है। पौधों को जरूरत के अनुसार पोषक तत्व मिलने से टमाटर और गोभी की फसल स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण तैयार हो रही है। उत्पादन बढ़ने के साथ खेती की लागत में कमी आई है, जिससे सब्जी उत्पादन पहले की तुलना में अधिक लाभकारी हो गया है।
वैज्ञानिक खेती से आत्मनिर्भर बन रहे किसान
राज्य शासन द्वारा सूक्ष्म सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर जल संरक्षण, उत्पादन वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सरगुजा सहित प्रदेश के कई जिलों में किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए वैज्ञानिक और तकनीक आधारित कृषि को अपना रहे हैं। इससे खेती अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आत्मनिर्भर बन रही है।