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वायु अस्त्र-1 का परीक्षण
वायु अस्त्र-1 का परीक्षण
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आसमान का नया काल : पोखरण से जोशीमठ तक गूंजी स्वदेशी Kamikaze ड्रोन वायु अस्त्र-1 की दहाड़

NIBE Limited ने भारतीय सेना के लिए स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम Vayu Astra-1 का सफल परीक्षण किया। इसका परीक्षण राजस्थान के पोखरण रेगिस्तान और उत्तराखंड के जोशीमठ/मलारी के 14,000 फीट ऊंचे बर्फीले इलाके में किया गया। इस ड्रोन की प्रमुख खूबियों में 100 किमी मारक क्षमता, 90 मिनट से अधिक उड़ान समय, 1 मीटर से कम CEP (बेहद सटीक निशाना), री-अटैक क्षमता और 10 किलोग्राम वारहेड शामिल हैं।

कीर्तिमान न्यूज
22 May 2026, 09:46 AM
नई दिल्ली

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सीमाओं पर चुनौतियों को देखते हुए भारत अपनी रक्षा प्रणाली को 'त्रिशूल' की तरह मजबूत कर रहा है। थल, नभ और जल... तीनों मोर्चों पर देश को अभेद्य बनाने की दिशा में भारत को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। पुणे स्थित दिग्गज डिफेंस टेक कंपनी NIBE Limited ने भारतीय सेना के लिए पूरी तरह स्वदेशी लोइटरिंग मुनिशन (Loitering Munition) सिस्टम ‘Vayu Astra-1’ (वायु अस्त्र-1) का दो अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में सफल परीक्षण कर इतिहास रच दिया है।

यह मेड-इन-इंडिया हथियार आधुनिक युद्धक्षेत्र में गेमचेंजर साबित होने वाला है, जिसकी भनक लगते ही सीमा पार दुश्मनों के खेमे में खलबली मच गई है।

पोखरण के रेगिस्तान से जोशीमठ की पहाड़ियों तक अचूक निशाना

NIBE लिमिटेड द्वारा विकसित 'वायु अस्त्र-1' का परीक्षण किसी एक इलाके तक सीमित नहीं था। कंपनी ने इसके दो कठोर और विपरीत वातावरणों में परीक्षण किए:

  • पहला परीक्षण (पोखरण, राजस्थान): यहाँ इस आत्मघाती ड्रोन के 'एंटी-पर्सनल वेरिएंट' का प्रदर्शन किया गया। चिलचिलाती गर्मी और रेतीले माहौल में इसने अपनी ताकत दिखाई।

  • दूसरा परीक्षण (जोशीमठ/मलारी, उत्तराखंड): चीन सीमा के करीब 14,000 फीट से अधिक की बर्फीली और दुर्गम ऊंचाई पर इस ड्रोन ने अपनी उड़ान क्षमता और तकनीकी श्रेष्ठता को साबित किया।

क्या है CEP? परीक्षण के दौरान वायु अस्त्र-1 ने 1 मीटर से भी कम का सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) हासिल किया। तकनीकी भाषा में इसका मतलब यह है कि यह मिसाइल/ड्रोन अपने तय लक्ष्य से एक मीटर भी इधर-उधर नहीं भटकता। इसका निशाना 100% अचूक है।

आत्मनिर्भर भारत का बढ़ता दम, उड़ी पाकिस्तान-चीन की नींद

वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया ड्रोन वॉरफेयर (रूस-यूक्रेन युद्ध इसका सटीक उदाहरण है) की तरफ बढ़ रही है, भारत का यह कदम भारतीय सेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।

एक तरफ जहां भारत 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है और एक से बढ़कर एक स्वदेशी हथियारों का निर्माण कर रहा है; वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान आर्थिक बदहाली के बीच आज भी विदेशी बैसाखियों और कर्ज के भरोसे जी रहा है। 'वायु अस्त्र-1' जैसी स्वदेशी तकनीक का भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होना यह साफ संदेश है कि अब भारत की तरफ आंख उठाने वाले दुश्मनों का बचना नामुमकिन है।

वायु अस्त्र-1' की 5 बड़ी खूबियां

इस स्वदेशी 'कामिकेज' (आत्मघाती) ड्रोन में कई ऐसी खूबियां हैं जो इसे दुनिया के बेहतरीन ड्रोन्स की कतार में खड़ा करती हैं:

  • 100 किमी की मारक क्षमता: यह ड्रोन दुश्मन की सीमा के 100 किलोमीटर अंदर घुसकर तबाही मचाने में सक्षम है।

  • 90 मिनट का फ्लाई-टाइम: इसने 14,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर लगातार 90 मिनट (डेढ़ घंटे) से अधिक समय तक हवा में मंडराने (Loiter करने) का नया रिकॉर्ड बनाया है।

  • सर्जीकल स्ट्राइक री-अटैक क्षमता: परीक्षण के दौरान इसने सबसे खास तकनीक का प्रदर्शन किया। अगर मिशन को बीच में रोकना पड़े (Abort), तो यह वापस घूम सकता है और फिर से उसी या नए लक्ष्य पर दोबारा हमला (Re-attack) कर सकता है।

  • टैंकों का कब्रिस्तान: 10 किलोग्राम वजनी विनाशकारी वारहेड (गोला-बारूद) से लैस यह ड्रोन दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों, बंकरों और सेना के टैंकों को पलक झपकते ही कबाड़ में बदलने की ताकत रखता है।

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