मगरमच्छ का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में डर की भावना पैदा होती है। लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव की कहानी इस धारणा से बिल्कुल अलग है। यहां वर्षों तक एक मगरमच्छ ऐसा भी रहा, जिसने इंसानों और वन्यजीवों के बीच भरोसे और सह-अस्तित्व की अनोखी मिसाल पेश की।
इस मगरमच्छ का नाम था गंगाराम। बावा मोहतरा गांव के बीच स्थित तालाब में रहने वाला गंगाराम लंबे समय तक ग्रामीणों के जीवन का हिस्सा बना रहा। गांव की महिलाएं इसी तालाब से पानी भरती थीं, किसान अपने मवेशियों को पानी पिलाने लाते थे और बच्चे तालाब के आसपास खेलते थे। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार लोगों का तालाब में नहाते समय गंगाराम से सामना हुआ।
देश-विदेश तक पहुंची गंगाराम की कहानी
कभी-कभी लोग पानी के अंदर उससे टकरा भी जाते थे, लेकिन गंगाराम ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। वह हमेशा खुद रास्ता बदल लेता था और शांत स्वभाव से तालाब में रहता था। धीरे-धीरे गंगाराम के शांत व्यवहार की चर्चा गांव से निकलकर देशभर में फैल गई। वन्यजीव प्रेमी, पर्यटक और विशेषज्ञ बावा मोहतरा पहुंचने लगे और उन्होंने इंसान तथा मगरमच्छ के बीच बने इस अनोखे संबंध को करीब से देखा। गंगाराम की वजह से बावा मोहतरा गांव को भी एक अलग पहचान मिली। यह गांव इंसान और वन्यजीवों के बीच बेहतर तालमेल के उदाहरण के रूप में चर्चा में आया।गंगाराम की मौत पर गांव में छाया था मातम
जब गंगाराम की मौत हुई तो पूरे गांव में शोक का माहौल था। ग्रामीणों ने उसे केवल एक जंगली जीव नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह सम्मान दिया और भावुक होकर उसे अंतिम विदाई दी। गंगाराम को दी गई यह विदाई भी काफी चर्चा में रही और लोगों ने इसे इंसान तथा प्रकृति के बीच जुड़ाव की अनोखी तस्वीर बताया। अब गंगाराम की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। बच्चों को उसकी कहानी सुनाकर वन्यजीव संरक्षण, प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व का संदेश दिया जा रहा है। हालांकि वन विभाग और विशेषज्ञों का कहना है कि जंगली जीवों के साथ हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए।