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भारत-अमेरिका व्यापार पर 10% टैरिफ लागू होने का सांकेतिक दृश्य।
भारत-अमेरिका व्यापार पर 10% टैरिफ लागू होने का सांकेतिक दृश्य।
विदेश

अमेरिका का भारत पर 10% नया टैरिफ लागू, निर्यातकों के लिए बढ़ी चुनौती

अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुड़े मामलों को लेकर उठाया गया है। नए टैरिफ से टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, लेदर, कृषि और इंजीनियरिंग जैसे भारतीय निर्यात क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है, हालांकि पहले प्रस्तावित 12.5% की तुलना में भारत को 10% टैरिफ लगाकर कुछ राहत दी गई है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
24 Jul 2026, 04:57 PM
अमेरिका
अमेरिका ने शुक्रवार से भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह फैसला अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत लिया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम उन उत्पादों को लेकर उठाया गया है, जिनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े जोखिमों पर निगरानी की जा रही है। यह नया टैरिफ ऐसे समय लागू हुआ है, जब ट्रम्प प्रशासन द्वारा पहले लगाया गया 15% अस्थायी ग्लोबल टैरिफ समाप्त हो गया है। यानी पुराने अस्थायी शुल्क की जगह अब नया 10% टैरिफ प्रभावी हो गया है। 

60 देशों पर अतिरिक्त शुल्क, भारत 10% वाले समूह में 

अमेरिका ने कुल 60 देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। इनमें 17 देशों पर 10% और 43 देशों पर 12.5% शुल्क लागू किया गया है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान और श्रीलंका को 10% टैरिफ वाले समूह में रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों ने जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों पर नियंत्रण या निगरानी बढ़ाने की दिशा में कुछ कदम उठाए हैं।

किन भारतीय उद्योगों पर पड़ेगा असर ? 

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ का सबसे अधिक असर उन क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जिनकी बिक्री का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर करता है। इनमें प्रमुख रूप से टेक्सटाइल और गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर उत्पाद, कृषि एवं खाद्य उत्पाद, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स और कई मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त शुल्क लगने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं। इससे अमेरिकी खरीदार दूसरे देशों की ओर रुख कर सकते हैं या भारतीय निर्यातकों पर कीमतें कम करने का दबाव बढ़ सकता है। 

भारत को 12.5% की जगह 10% टैरिफ क्यों मिला ? 

शुरुआती प्रस्ताव में भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। हालांकि बाद में भारत सरकार द्वारा श्रम मानकों, सप्लाई चेन की निगरानी और विदेशी व्यापार नीति में किए गए कुछ बदलावों के बाद अमेरिका ने इसमें 2.5% की राहत दी। अमेरिकी फेडरल नोट के अनुसार, जून में प्रस्तावित टैरिफ के बाद भारत ने 14 जून को अपनी विदेशी व्यापार नीति में संशोधन किया। अमेरिका का मानना है कि भारत ने श्रमिक अधिकारों की निगरानी और सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कुछ सकारात्मक पहल की हैं। इसी आधार पर प्रस्तावित शुल्क घटाकर 10% किया गया। हालांकि अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि 10% टैरिफ लागू रहने का मतलब यह नहीं है कि भारत को पूरी छूट मिल गई है। अमेरिका चाहता है कि भारत जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों में नियमों के प्रभावी पालन को और मजबूत करे।

क्या होती है फोर्स्ड लेबर ? 

फोर्स्ड लेबर यानी जब किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध काम कराया जाए। इसमें धमकी देना, कर्ज के दबाव में काम करवाना, हिंसा, वेतन रोकना, पहचान संबंधी दस्तावेज जब्त करना या नौकरी छोड़ने की स्वतंत्रता न देना जैसी परिस्थितियां शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानता है। अमेरिका का कहना है कि यदि किसी उत्पाद की सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी के प्रमाण मिलते हैं, तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ या आयात प्रतिबंध लगाया जा सकता है। 

सेक्शन 301 क्या है ? 

सेक्शन 301 अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 का एक अहम प्रावधान है। इसके तहत अमेरिकी सरकार किसी भी ऐसे देश के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, जिसकी व्यापारिक नीतियां अमेरिकी उद्योगों या कारोबार के लिए अनुचित या नुकसानदायक मानी जाएं। इस प्रावधान के तहत अतिरिक्त टैरिफ, आयात प्रतिबंध या अन्य व्यापारिक कार्रवाई की जा सकती है। जांच की प्रक्रिया अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की ओर से पूरी की जाती है और अंतिम निर्णय राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होता है।

पहले भी कई देशों पर हुई कार्रवाई 

फोर्स्ड लेबर के मुद्दे पर अमेरिका पहले भी कई देशों और उद्योगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर चुका है। खासतौर पर चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले कॉटन, टमाटर, सोलर पैनल और उनसे जुड़े उत्पादों पर आयात प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके अलावा समुद्री खाद्य उत्पाद, पाम ऑयल, रबर, कोको, टेक्सटाइल और खनन उद्योग भी अमेरिकी जांच और व्यापारिक कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं।
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