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Aditi Singh meeting with Chief Minister Yogi Adityanath (Image Source: social media)
Aditi Singh meeting with Chief Minister Yogi Adityanath (Image Source: social media)
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Uttar Pradesh Politics: क्या टल गया अदिति सिंह का घर वापसी का प्लान? योगी से मुलाकात के बाद बदले समीकरण

Uttar Pradesh Politics: भाजपा विधायक अदिति सिंह की सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद कांग्रेस में वापसी की अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। रायबरेली की राजनीति में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 19 Sep 2026, 02:50 PM · अपडेट: 02 Nov 2026, 01:25 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
लखनऊ
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Uttar Pradesh Politics: आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। जातीय समीकरणों को दुरुस्त करने से लेकर रूठों को मनाने का दौर जारी है। इसी बीच, रायबरेली सदर सीट से भारतीय जनता पार्टी की विधायक अदिति सिंह की एक तस्वीर ने लखनऊ के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पिछले कई दिनों से उनके पाला बदलने और दोबारा कांग्रेस में शामिल होने की खबरें तेजी से तैर रही थीं, जिन पर अब फिलहाल विराम लगता दिख रहा है।

सीएम आवास पर मुलाकात और शिष्टाचार की राजनीति 

अदिति सिंह ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा साझा की गई इस तस्वीर में दोनों नेताओं के बीच काफी सहज बातचीत देखने को मिली। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को केवल एक 'शिष्टाचार भेंट' बताया जा रहा है। अदिति सिंह ने भी खुद इस बात को दोहराया कि यह किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि सामान्य मुलाकात थी। लेकिन सियासी जानकार मानते हैं कि ऐन चुनाव से पहले ऐसी मुलाकातों के पीछे संदेश गहरे होते हैं।

आखिर क्यों उठीं कांग्रेस में लौटने की अटकलें? 

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा था कि अदिति सिंह भाजपा के भीतर अपनी स्थिति से बहुत सहज नहीं हैं। चर्चाएं थीं कि वह पुराने घर यानी कांग्रेस में वापसी की जमीन तलाश रही हैं। हालांकि, अदिति सिंह इन तमाम दावों को पहले ही सिरे से खारिज कर चुकी थीं, लेकिन राजनीति में जब तक खुद कोई नेता सार्वजनिक तौर पर विराम न लगाए, ऐसी खबरें ठंडी नहीं पड़तीं।

अखिलेश सिंह की विरासत और अदिति का राजनीतिक सफर 

रायबरेली सदर सीट का इतिहास बिना बाहुबली नेता स्वर्गीय अखिलेश सिंह के अधूरा है। अखिलेश सिंह इस सीट से कई बार विधायक रहे और क्षेत्र में उनका मजबूत प्रभाव माना जाता था।

  • 2017 का चुनाव: अदिति सिंह ने अपने पिता की विरासत को संभालते हुए कांग्रेस के टिकट पर राजनीति में कदम रखा और एकतरफा जीत हासिल की।

  • 2022 का बदलाव: समय के साथ कांग्रेस नेतृत्व से उनकी दूरियां बढ़ीं और उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। 2022 में भाजपा के टिकट पर उन्होंने फिर से जीत दर्ज कर अपनी पकड़ साबित की।

रायबरेली में गांधी परिवार के पारंपरिक प्रभाव के बीच अदिति सिंह का रुख हमेशा से बेहद मायने रखता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस ताजा मुलाकात के बाद फिलहाल उनके पाला बदलने की अटकलों पर बर्फ जरूर जम गई है, लेकिन चुनावी मौसम में आगे क्या मोड़ आता है, इस पर सबकी नजरें बनी रहेंगी।

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