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10 साल से बन चुकी हैं सैकड़ों बंदरों की अम्मा
10 साल से बन चुकी हैं सैकड़ों बंदरों की अम्मा
मनोरंजन

वर्दी से वात्सल्य तक : मिलिए तमिलनाडु की इस जांबाज रिटायर्ड पुलिस अफसर से, जो पिछले 10 साल से बन चुकी हैं सैकड़ों बंदरों की अम्मा

तमिलनाडु की 76 वर्षीय रिटायर्ड पुलिस अधिकारी Malathi पिछले 10 वर्षों से हर शनिवार मदुरै के तिरुप्परंकुंड्रम क्षेत्र में 350-400 बंदरों को भोजन करा रही हैं। 33 साल तक पुलिस सेवा देने के बाद उन्होंने बेजुबान जानवरों की सेवा को अपना मिशन बना लिया। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद वे केले, चावल और फल लेकर विभिन्न स्थानों पर पहुंचती हैं।

कीर्तिमान न्यूज | अप्पू धीवर
प्रकाशित: 24 Jun 2026, 09:59 AM · अपडेट: 11 Sep 2026, 02:01 AM
चेन्नई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

कंधे पर कभी खाकी वर्दी का रौब और कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी थी, लेकिन आज उसी हाथ में बेजुबान जानवरों के लिए ममता की थाली है। सोशल मीडिया पर इन दिनों तमिलनाडु की एक बुजुर्ग महिला का वीडियो लोगों का दिल जीत रहा है। ये कोई आम बुजुर्ग महिला नहीं, बल्कि 76 साल की रिटायर्ड पुलिस अधिकारी मालती हैं। लोग इन्हें प्यार से 'बंदरों वाली अम्मा' और 'दादी' कह रहे हैं, जो पिछले एक दशक से हर हफ्ते सैकड़ों भूखे बंदरों का पेट भर रही हैं।

33 साल खाकी की सेवा, अब बेजुबानों का सहारा

मालती जी ने तमिलनाडु पुलिस में पूरे 33 साल तक अपनी निष्ठावान सेवाएं दीं और साल 2010 में वे सब-इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हुईं। अमूमन लोग रिटायरमेंट के बाद आराम और सुकून की जिंदगी तलाशते हैं, लेकिन मालती जी के इरादे कुछ और ही थे। साल 2015 में उन्होंने मदुरै के तिरुप्परंकुंड्रम इलाके में बेजुबान बंदरों की दुर्दशा देखी, जिसके बाद उन्होंने एक बड़ा संकल्प लिया। तब से लेकर आज तक, यानी पिछले 10 सालों से यह सिलसिला बिना रुके जारी है।

एक आवाज... और पहाड़ियों से दौड़ पड़ते हैं सैकड़ों बंदर

हर शनिवार की दोपहर तिरुप्परंकुंड्रम के मुरुगन मंदिर, सरवण पोइगई और गुफा मंदिर जैसे करीब छह अलग-अलग ठिकानों पर एक अनोखा नजारा देखने को मिलता है। मालती जी जैसे ही इन इलाकों में पहुंचकर अपनी खास आवाज में बंदरों को पुकारती हैं, पहाड़ियों और पेड़ों से तकरीबन 350 से 400 बंदर बिना किसी डर के उनकी तरफ दौड़े चले आते हैं।

बढ़ती उम्र और घुटनों के दर्द जैसी सेहत की दिक्कतों के बावजूद मालती जी हर शनिवार खुद भारी-भरकम टोकरियों में केले, पके हुए चावल और फल लेकर पहुंचती हैं। बंदर भी उनके पास इतने सुरक्षित महसूस करते हैं कि सीधे उनके हाथों से खाना खाते हैं।

"इन बेजुबानों के चेहरे की तृप्ति और सेवा से मुझे जो आत्मिक सुकून मिलता है, वही मेरी जिंदगी की असली कमाई है। जब तक मेरी सांसें चलेंगी और शरीर साथ देगा, मैं अपने इन बच्चों को भूखा नहीं सोने दूंगी।" — मालती, रिटायर्ड पुलिस अधिकारी

इंटरनेट पर मिला 'सैल्यूट'

आजकल जहां लोग अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते, वहीं मालती जी का यह निस्वार्थ सेवा भाव इंटरनेट पर हर किसी को भावुक कर रहा है। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, और देश-दुनिया से लोग इस पूर्व पुलिस अफसर के जज्बे और मानवता को सलाम कर रहे हैं। वाकई, मालती जी ने साबित कर दिया है कि सेवा की कोई उम्र नहीं होती और दिल में दया हो तो इंसान कहीं भी खुशियां बांट सकता है।

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