बंजर जमीन बनी कमाई का जरिया : धमतरी में औषधीय खेती से बदली महिलाओं की किस्मत
धमतरी जिले में औषधीय खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आय और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बन रही है। खस, लेमनग्रास, ब्राह्मी, बच और अश्वगंधा जैसे पौधों की खेती से महिलाओं ने अनुपयोगी जमीन को कमाई के स्रोत में बदल दिया है। प्रशासन, बिहान मिशन और औषधीय पादप बोर्ड की मदद से शुरू हुए इस अभियान से सैकड़ों महिला किसान जुड़ी हैं और अब इसे 500 एकड़ तक विस्तार देने की तैयारी है।
कीर्तिमान डेस्क
21 Jul 2026, 08:20 AM
रायपुर
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सिंदूरी, सतावर और अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। धमतरी जिले की कई महिलाओं ने अनुपयोगी जमीन और बेकार पड़े जलस्रोतों का उपयोग कर औषधीय खेती शुरू की है। इससे न सिर्फ जमीन हरी-भरी हुई, बल्कि महिलाओं को नियमित आय का साधन भी मिला है।
धमतरी जिले में कभी बेकार पड़ी भूमि अब औषधीय पौधों की खेती से नई पहचान बना रही है। यहां महिलाओं ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर खस, ब्राह्मी, बच और लेमनग्रास जैसी फसलों को अपनाया है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।
औषधीय खेती को मिला बढ़ावा
धमतरी कृषि प्रधान जिला है, जहां अधिकांश किसान धान की खेती पर निर्भर रहे हैं। हालांकि सीमित आय और अनुपयोगी जमीन की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। जिला प्रशासन ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए औषधीय एवं सुगंधीय फसलों की खेती को बढ़ावा दिया। वर्ष 2025 में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से यह अभियान शुरू किया गया। महिला स्व-सहायता समूहों को इस योजना का केंद्र बनाया गया और उन्हें पौध सामग्री, प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहायता दी गई। महिलाओं को खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। सबसे बड़ी सुविधा यह रही कि उत्पादों की खरीदी के लिए बाय-बैक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई, जिससे किसानों को बाजार की चिंता नहीं रही।
औषधीय खेती से बढ़ी महिलाओं की आय
योजना के शुरुआती चरण में करीब 150 एकड़ क्षेत्र में 200 महिला स्व-सहायता समूह सदस्यों को जोड़ा गया। कई क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती से महिलाओं को प्रति एकड़ औषधीय खेती से ग्रामीण महिलाओं को मिला नया रोजगारलगभग एक लाख रुपये तक की आय मिलने लगी। इस कमाई से उन्होंने बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और छोटे व्यवसायों में निवेश किया। कंडेल की महिला कृषकों का कहना है कि पहले उनकी निर्भरता केवल धान की खेती पर थी। प्रशिक्षण और बाजार की सुविधा मिलने के बाद औषधीय खेती आसान लगी। अब महिलाएं खेती के साथ बैंकिंग, समूह प्रबंधन और उद्यमिता में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। किसानों का कहना है कि कम पानी वाली जमीन में लेमनग्रास और खस जैसी फसलें बेहतर परिणाम दे रही हैं। अब जिले के कई किसान पारंपरिक खेती के साथ औषधीय खेती को अतिरिक्त आय के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
लखपति दीदी अभियान को मिली मजबूती
धमतरी का औषधीय खेती मॉडल महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा उदाहरण बन रहा है। सरकार की लखपति दीदी पहल के तहत महिलाओं को खेती, वनोपज और ग्रामीण उद्यमिता से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस मॉडल में सिर्फ उत्पादन पर नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग और बाजार व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कुरूद विकासखंड के कोटगांव और पचपेड़ी में पौध नर्सरी विकसित की जा रही है। भविष्य में तेल निष्कर्षण, पैकेजिंग और प्रसंस्करण से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। धमतरी के औषधीय खेती मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। जिले के नवाचार को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान भी प्राप्त हुआ। इसके बाद कई राज्यों के किसान और अधिकारी इस मॉडल को समझने के लिए धमतरी पहुंच रहे हैं।
500 एकड़ विस्तार का लक्ष्य
पहले चरण की सफलता के बाद अब इस अभियान को 500 एकड़ तक बढ़ाने की तैयारी है। लक्ष्य है कि अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए। औषधीय खेती से आय बढ़ने के साथ पर्यावरण को भी लाभ मिल रहा है। इन पौधों से हरियाली बढ़ रही है, भूमि संरक्षण हो रहा है और जैव विविधता को बढ़ावा मिल रहा है। धमतरी का यह मॉडल साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों, महिला शक्ति और वैज्ञानिक तकनीक के बेहतर उपयोग से ग्रामीण विकास को नई दिशा दी जा सकती है। औषधीय खेती अब केवल फसल नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और ग्रामीण समृद्धि का माध्यम बन रही है।