जिले के छुरा विकासखंड में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के दौरान कथित अनियमितताओं
का मामला अब विभागीय कार्रवाई की दहलीज तक पहुंच गया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के.एल. मतावले के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की
अनुशंसा करते हुए गरियाबंद कलेक्टर ने स्कूल शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा है। हालांकि,
प्रस्ताव के साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं होने के कारण लोक शिक्षण
संचालनालय (डीपीआई) ने फिलहाल कोई
निर्णय नहीं लिया है और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ)
से पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट, स्पष्ट
अभिमत तथा सभी संबंधित अभिलेख तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मामला सामने
आने के बाद शिक्षा विभाग में भी हलचल बढ़ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच
रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है।
युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में सामने आई थीं शिकायतें
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को संतुलित करने के उद्देश्य से युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया चलाई गई थी। इसी दौरान छुरा विकासखंड में अतिरिक्त शिक्षकों की सूची तैयार करने, रिक्त पदों के निर्धारण, वरिष्ठता सूची बनाने और काउंसिलिंग प्रक्रिया को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि शासन के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। कई शिक्षकों को नियमों के विपरीत अतिरिक्त घोषित किया गया, जबकि कुछ स्थानों पर वास्तविक रिक्तियों का सही आकलन नहीं किया गया। इससे स्थानांतरण और पदस्थापना प्रक्रिया विवादों में घिर गई।
कलेक्टर ने जांच के बाद भेजा कार्रवाई का प्रस्ताव
मामले की शिकायतें मिलने के बाद जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच कराई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर गरियाबंद कलेक्टर ने बीईओ के.एल. मतावले के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा। प्रस्ताव में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और निर्धारित प्रक्रिया के पालन में कमी का उल्लेख किया गया है।
डीपीआई ने कहा- दस्तावेजों के बिना कार्रवाई संभव नहीं
सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर कार्यालय से भेजे गए प्रस्ताव के साथ जांच से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं थे। इस पर लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद को पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि प्रकरण पर आगे की कार्रवाई के लिए तथ्यात्मक प्रतिवेदन, स्पष्ट अभिमत, जांच प्रतिवेदन और संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराए जाएं।
डीपीआई ने यह भी कहा है कि आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने के बाद पूरे मामले का परीक्षण किया जाएगा और उसके आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

शिक्षा विभाग में बढ़ी हलचल
बीईओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव सामने आने के बाद शिक्षा विभाग
में चर्चा का माहौल है। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर पहले भी कई जिलों में शिकायतें
सामने आ चुकी हैं, लेकिन गरियाबंद में मामला
अब विभागीय कार्रवाई तक पहुंच गया है। इससे जिले के शिक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली
भी सवालों के घेरे में आ गई है।
जांच रिपोर्ट तय करेगी आगे की दिशा
फिलहाल मामला जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के स्तर पर है। यदि जिला शिक्षा
अधिकारी द्वारा भेजी जाने वाली रिपोर्ट और अभिलेखों में आरोपों की पुष्टि होती है तो
बीईओ के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण,
नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत विभागीय
कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो विभाग नियमानुसार
आगे का निर्णय लेगा।


क्या है मामला
- छुरा विकासखंड में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के दौरान अनियमितता की शिकायतें मिली थीं।
- गरियाबंद कलेक्टर ने बीईओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा।
- डीपीआई ने प्रस्ताव के साथ दस्तावेज अधूरे पाए।
- डीईओ से तथ्यात्मक रिपोर्ट और सभी अभिलेख मांगे गए हैं।
- दस्तावेज मिलने के बाद विभाग अंतिम निर्णय लेगा।