"राष्ट्रीय सम्मान" के लिए 15 परिणाम मिले
विदेश
लिपुलेख : विवाद फिर गरमाया, नेपाल में भारत को लेकर बढ़ी नाराजगी
भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नेपाल में बलेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को लेकर भारत के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है। नेपाल का दावा है कि ये इलाके उसके हैं, जबकि भारत इन्हें अपना हिस्सा मानता है। यह विवाद 1815 की सुगौली संधि और काली नदी के वास्तविक उद्गम स्थल को लेकर जुड़ा हुआ है। लिपुलेख दर्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा, भारत-चीन व्यापार और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। नेपाल के विशेषज्ञ पुराने नक्शों और दस्तावेजों के आधार पर अपने दावे को सही बता रहे हैं, जबकि भारत का कहना है कि सीमा विवाद बातचीत से सुलझाए जा सकते हैं।
छत्तीसगढ़
कम उम्र में बड़ा मुकाम : छत्तीसगढ़ के युवा फिल्मकार एस अंशु धुरंधर की राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय पहचान
छत्तीसगढ़ के युवा फिल्मकार एस अंशु धुरंधर ने कम उम्र में फिल्म और साहित्य दोनों क्षेत्रों में राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। उनकी फिल्मों और पुस्तकों में सामाजिक, ऐतिहासिक और प्रेरक विषयों को प्रमुखता दी गई है। अब तक उनकी फिल्मों का चयन 20 से अधिक फिल्म महोत्सवों में हो चुका है और उन्हें 10 से ज्यादा पुरस्कार मिल चुके हैं। वर्तमान में वे नई फिल्मों और पुस्तकों पर काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक दिशा देना है।
देश
आशा भोसले : सुरों की वह नदी, जो आठ दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में बहती रही
आठ दशक, एक लंबा समय। लेकिन आशा भोसले के लिए यह केवल समय नहीं था, यह एक निरंतर बहती हुई सुरों की नदी थी। 12 हजार से अधिक गीत, 20 से ज्यादा भाषाएं, अनगिनत रंग और भावनाएं। यह सिर्फ उपलब्धि नहीं, यह संवेदनाओं का महासागर है, जिसमें हर पीढ़ी ने अपने हिस्से की खुशियां, दर्द और प्रेम खोजा। ‘दम मारो दम’ की बेपरवाही, ‘इन आंखों की मस्ती’ की नजाकत, ‘पिया तू अब तो आजा’ की शरारत, हर गीत में उन्होंने सिर्फ शब्द नहीं गाए, उन्होंने जिंदगी को स्वर दिया।