"महिला स्व-सहायता समूह" के लिए 43 परिणाम मिले
हर्बल उत्पाद : छत्तीसगढ़ की 55 हजार महिलाएं वन धन केंद्रों से जुड़कर बनीं आर्थिक रूप से मजबूत
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में संचालित 155 वन धन विकास केंद्र महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभरे हैं। इन केंद्रों से करीब 55 हजार महिलाएं जुड़कर लघु वनोपज संग्रहण, प्रसंस्करण और हर्बल उत्पाद निर्माण के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं। पिछले पांच वर्षों में महिलाओं को करोड़ों रुपये का कमीशन और लाभांश प्राप्त हुआ है।
आजीविका मॉडल : सेरीखेड़ी पहुंचे केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान, महिला समूहों के नवाचार की सराहना
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने रायपुर के सेरीखेड़ी स्थित मल्टी यूटिलिटी सेंटर का दौरा कर अजा परियोजना, पिंक दीदी ई-ऑटो सेवा और महिला स्व-सहायता समूहों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण आजीविका मॉडल को देशभर के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
महासमुंद
घर की सुरक्षा अब जागरूक हाथों में, खोपली की महिलाओं ने सीखी असली-नकली की पहचान
महासमुंद जिले के ग्राम खोपली स्थित शासकीय हाई स्कूल में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) रायपुर शाखा द्वारा SHINE प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों की 35 महिलाओं को ISI मार्क, हॉलमार्किंग, BIS Care App और गुणवत्ता युक्त उत्पादों की पहचान के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में खाद्य पदार्थों में मिलावट, बच्चों की सुरक्षा, रसोई के बर्तन और आभूषणों की शुद्धता जैसे विषयों पर भी जागरूक किया गया।
ग्रीन गोल्ड : हर्बल समृद्धि से आत्मनिर्भरता की ओर, वन संपदा से समृद्धि की नई कहानी
छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा और दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से “हर्बल स्टेट” के रूप में नई पहचान बना रहा है। तेंदूपत्ता, बांस, लाख, शहद और औषधीय पौधों जैसे वनोपज, जिन्हें “ग्रीन गोल्ड” कहा जाता है, राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। जामगांव की केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई और “छत्तीसगढ़ हर्बल्स” ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाया जा रहा है। आधुनिक प्रसंस्करण, वैज्ञानिक भंडारण और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने इन उत्पादों की मांग को बढ़ाया है।
7 मई को सुशासन तिहार के तहत चावल महोत्सव, रोजगार एवं आवास दिवस का एक साथ आयोजन
छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में 7 मई को सुशासन तिहार के तहत एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें चावल महोत्सव, रोजगार दिवस और आवास दिवस एक साथ मनाए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी समस्याओं का मौके पर समाधान करना, पात्र हितग्राहियों को योजनाओं की जानकारी देना और ग्रामीण विकास कार्यों को तेज करना है। साथ ही जल संरक्षण और आजीविका बढ़ाने के लिए विशेष गतिविधियाँ भी की जाएंगी। पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तकनीक और स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया है।
महासमुंद
सरायपाली में राज्यपाल का सख्त संदेश: “डबरी खनन बढ़ाओ, जल बचाओ – हर खेत तक पहुंचे विकास”
राज्यपाल रमेन डेका ने सरायपाली में आयोजित समीक्षा बैठक में किसानों को डबरी खनन के लिए प्रोत्साहित किया और जल संरक्षण कार्यों की सराहना की। उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और हरित विकास पर जोर दिया। जैविक खेती, रासायनिक उर्वरक कम करने और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने की हिदायत दी। स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में टीबी, कैंसर और मोतियाबिंद के लिए जनसहभागिता बढ़ाने, योग को जन-जन तक पहुंचाने और महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर बल दिया। बैठक में जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
छत्तीसगढ़
स्व-सहायता समूह से बदली तकदीर: डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल
छत्तीसगढ़ की माधुरी जंघेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर डेयरी, खेती और पशु आहार व्यवसाय के जरिए सालाना 5.50 लाख रुपये की आय हासिल की और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं।