"महिला स्व-सहायता समूह" के लिए 43 परिणाम मिले
स्टार्टअप
कम बजट में स्टार्टअप : घर से शुरू करें अचार, पापड़ और बड़ी का कारोबार, मिलेगा बेहतर मुनाफा
यदि घर में रसोई, जरूरी बर्तन और सामान सुखाने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है तो अचार, पापड़ और बड़ी बनाने का व्यवसाय करीब 15 से 30 हजार रुपए में शुरू किया जा सकता है। शुरुआत में कच्ची सामग्री पर 5 से 8 हजार रुपए मसाले और खाद्य तेल पर 3 से 5 हजार रुपए पैकेट-बोतल पर 3 से 6 हजार रुपए तथा सीलिंग और वजन मशीन पर लगभग 3 से 5 हजार रुपए खर्च हो सकते हैं।
महासमुंद
खट्टीडीह कापा में महिला शक्ति का सम्मान, आत्मनिर्भरता के लिए किया प्रेरित
महासमुंद जिले के खट्टीडीह कापा में महिला सशक्तिकरण से स्वावलंबन कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए प्रेरित किया गया।
राज्य सरकार
बिहान योजना की पहल : अमारू में मत्स्य पालन से खुलेंगे रोजगार और आय के नए रास्ते
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत अमारू को इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) के तहत मत्स्य उत्पादन क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिला प्रशासन और बिहान मिशन की पहल से तालाब में 10 से 12 हजार मत्स्य स्पॉन का संचयन किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उपलब्ध होंगे और किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों व मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार
वन विभाग का हरित प्रयास : सीड बॉल अभियान से बदलेगी जंगलों की तस्वीर, बारिश के साथ धरती पर लौटेगी हरियाली
छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा सीड बॉल अभियान के माध्यम से हरियाली बढ़ाने और वनीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। मिट्टी, जैविक खाद और बीजों से तैयार सीड बॉल बारिश के बाद अंकुरित होकर नए पौधों का रूप लेते हैं। इस अभियान में स्कूल, कॉलेज, स्वयंसेवी संस्थाएं और ग्रामीणों की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य सरकार
नई उड़ान : नारायणपुर बना रेशम उत्पादन का मॉडल, महिलाओं को मिला रोजगार का सहारा
नारायणपुर जिले में मलबरी और टसर रेशम योजनाएं ग्रामीणों के लिए आजीविका का मजबूत साधन बन रही हैं। महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय हितग्राहियों को रोजगार के साथ आर्थिक मजबूती मिल रही है। रेशम उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन के साथ जिला आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहा है।
महासमुंद
समीक्षा बैठक : महासमुंद में पंचायत योजनाओं की समीक्षा, सीईओ ने दिए तेजी से काम के निर्देश
महासमुंद जिला पंचायत सीईओ अनुपमा आनंद ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को विकास कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता बनाए रखने और लंबित कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन और एनआरएलएम सहित कई योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई।
राज्य सरकार
बंजर जमीन बनी कमाई का जरिया : धमतरी में औषधीय खेती से बदली महिलाओं की किस्मत
धमतरी जिले में औषधीय खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आय और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बन रही है। खस, लेमनग्रास, ब्राह्मी, बच और अश्वगंधा जैसे पौधों की खेती से महिलाओं ने अनुपयोगी जमीन को कमाई के स्रोत में बदल दिया है। प्रशासन, बिहान मिशन और औषधीय पादप बोर्ड की मदद से शुरू हुए इस अभियान से सैकड़ों महिला किसान जुड़ी हैं और अब इसे 500 एकड़ तक विस्तार देने की तैयारी है।
राज्य सरकार
बड़ी कामयाबी : मोर गांव-मोर पानी अभियान ने बदली गांवों की तस्वीर, जल संचयन से बढ़ेगी किसानों खुशहाली
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान जल संरक्षण का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। जनभागीदारी से 2.85 लाख जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया, जिससे 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित हुई। इस पहल से भूजल स्तर सुधार, किसानों को सिंचाई सुविधा और ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
महासमुंद
वैज्ञानिक प्रशिक्षण : 19 जनजातीय महिलाओं ने सीखा वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन
महासमुंद के बागबाहरा विकासखंड की 19 जनजातीय महिला पशुपालकों को वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के लिए धमतरी जिले का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने आधुनिक पशुपालन, संतुलित पशु पोषण और डेयरी से आय बढ़ाने की तकनीकों की जानकारी हासिल की।
राज्य सरकार
वैज्ञानिक प्रशिक्षण : जोरातराई की महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनाने की पहल
महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के माडा ग्राम जोरातराई में 19 महिला स्व-सहायता समूह सदस्यों को डेयरी इकाई स्वीकृत होने के बाद पशुपालन एवं डेयरी प्रबंधन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में पशु स्वास्थ्य, चारा प्रबंधन, साइलेज, अजोला उत्पादन और दूध उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़
राजनांदगांव को 510 करोड़ की विकास सौगात, 333 विकास कार्यों का लोकार्पण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव में 510.89 करोड़ रुपये की लागत वाले 333 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। उन्होंने खरीफ 2026 से धान के स्थान पर दलहन-तिलहन की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।
राज्य सरकार
महासमुंद : सीईओ जिला पंचायत ने पीएमजीएसवाई सड़क व प्लास्टिक वेस्ट यूनिट का किया निरीक्षण
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत महासमुंद श्री हेमंत नंदनवार ने बागबाहरा कला में पीएमजीएसवाई फेज-4 के तहत निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण कर गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट का भी निरीक्षण किया और प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निपटान, महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने पर जोर दिया।