"जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी" के लिए 5 परिणाम मिले
रायपुर
Raipur News: रेलवे स्टेशनों पर गूंजेगी छत्तीसगढ़ी लोकधुन, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने रखी मांग
Raipur News: छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपराओं, बोली-भाखा, खान-पान और पारंपरिक पहनावे को बढ़ावा देने की मांग को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल के DRM को ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने रेलवे स्टेशनों पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीज-त्योहारों के दौरान पारंपरिक और प्रमाणित छत्तीसगढ़ी लोकगीत व लोकधुन बजाने की मांग रखी है।
रायपुर संभाग
जनआक्रोश : रसोई गैस 1013 रुपये तक पहुंची, किसानों की परेशानी पर निषदा बैठक में तीखी बहस
महानदी तट स्थित ग्राम निषदा में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना एवं जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी की बैठक में ग्रामीणों, किसानों और युवाओं ने महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, किसानों की समस्याओं और सामाजिक मुद्दों पर गहरा आक्रोश जताया। पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की बढ़ती कीमतों, खाद की कमी, पेपर लीक और परीक्षा विवादों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए।
रायपुर संभाग
कार्रवाई : कृषि विभाग–पुलिस ने पकड़ा संदिग्ध खाद का अवैध गोदाम
आरंग क्षेत्र के ग्राम कलई में कृषि विभाग, आरंग पुलिस और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना की संयुक्त कार्रवाई में नकली खाद सप्लाई करने वाले एक अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश से जुड़े लोग गांवों में किसानों से ऑर्डर लेकर बिना लेबल और बिना रजिस्ट्रेशन वाले रासायनिक उत्पादों की सप्लाई कर रहे थे।
बालोद
पुनरुद्धार महाअभियान : बालोद में भारी बवाल, नदी किनारे अवैध कब्जों पर चला प्रशासन का बुलडोजर
बालोद जिले में तांदुला नदी के जलग्रहण क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ बड़ी कार्रवाई की। ड्रोन सर्वे में नदी की चौड़ाई 220 मीटर से घटकर 80-90 मीटर होने का खुलासा हुआ था। प्रशासन ने अवैध खेती और कब्जों पर बुलडोजर चलाया, जिसके विरोध में किसानों और क्षेत्रीय संगठनों ने प्रदर्शन किया।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ी को जनगणना में शामिल करने की मांग तेज, जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन
छत्तीसगढ़ में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने मांग की है कि आगामी जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को मातृभाषा विकल्प के रूप में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान फॉर्म और पोर्टल में यह विकल्प न होने से राज्य के करोड़ों छत्तीसगढ़ी बोलने वालों का सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाएगा। संगठनों ने इसे भाषा की उपेक्षा बताते हुए छत्तीसगढ़ी को प्राथमिक शिक्षा, सरकारी कामकाज और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की भी मांग उठाई है।