CG Culture: दीपावली का पर्व नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ के गांवों में पारंपरिक सुआ नृत्य की गूंज सुनाई देने लगती है। खेती-किसानी के कामों से फुर्सत मिलने के बाद महिलाएं समूह बनाकर घर-घर पहुंचती हैं और सुआ गीतों के जरिए खुशहाली व समृद्धि का संदेश देती हैं। इसी लोकपरंपरा को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से बलौदाबाजार के नगर भवन में दो दिवसीय जिला स्तरीय सामूहिक सुआ संदेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन में बलौदाबाजार-भाटापारा के अलावा रायपुर और आसपास के क्षेत्रों से आई महिला नृत्य मंडलियों ने हिस्सा लिया। पारंपरिक वेशभूषा और सुआ गीतों के साथ महिलाओं ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों में भी खासा उत्साह नजर आया। लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अध्यक्ष डॉ. अजय यादव, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत यदु और नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन शामिल हुए।
अगली पीढ़ी तक पहुंचे छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराएं
कार्यक्रम की आयोजक डॉ. चांदनी चंद्राकर ने बताया कि सुआ संदेश आयोजन के पीछे मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकसंस्कृति को पहचान दिलाना और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में अलग-अलग जिलों की महिला टीमों ने उत्साह के साथ भागीदारी की। स्थानीय लोगों की रुचि और सहभागिता से यह भी स्पष्ट हुआ कि आज भी लोगों का अपनी परंपराओं से गहरा जुड़ाव है।राज्योत्सव में हों ऐसे सांस्कृतिक आयोजन
अमित बघेल मुख्य अतिथि अमित बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के कार्यक्रम केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उन्होंने सुझाव देते हुए काहा कि कार्तिक माह से लेकर राज्योत्सव तक प्रदेशभर में ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों की शृंखला आयोजित की जानी चाहिए ताकि स्थानीय कला और परंपराओं को व्यापक पहचान मिल सके।
नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन ने भी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए ऐसे आयोजनों को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि लोकनृत्य और लोकगीत हमारी पहचान हैं जिन्हें सहेजना और आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। दो दिनों तक चले इस आयोजन ने एक बार फिर दिखाया कि सुआ नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण परंपरा, सामूहिकता और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।






