"डेयरी व्यवसाय" के लिए 7 परिणाम मिले
राज्य सरकार
सरकारी योजनाओं से बदली किस्मत, डेयरी व्यवसाय से हर माह 50 हजार की कमाई
दृढ़ इच्छाशक्ति और शासकीय योजनाओं का सही संयोजन किसी भी प्रयास को बड़ी सफलता में बदल सकता है। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम करगा निवासी श्री अंगेश्वर कुर्रे ने इसे साबित कर दिखाया है। पशुधन में नस्ल सुधार, वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन अपनाकर उन्होंने डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है।
राज्य सरकार
वैज्ञानिक प्रशिक्षण : जोरातराई की महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनाने की पहल
महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के माडा ग्राम जोरातराई में 19 महिला स्व-सहायता समूह सदस्यों को डेयरी इकाई स्वीकृत होने के बाद पशुपालन एवं डेयरी प्रबंधन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में पशु स्वास्थ्य, चारा प्रबंधन, साइलेज, अजोला उत्पादन और दूध उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार
Mahasamund Dairy Scheme: मजदूरी छोड़ डेयरी बनी सहारा, महासमुंद की आदिवासी महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी
Mahasamund Dairy Scheme: जोरातराई गांव में पशु चिकित्सा विभाग की डेयरी योजना से 17 आदिवासी महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। दो गायों से शुरू हुआ सफर अब प्रतिदिन 180 लीटर दूध उत्पादन तक पहुंच गया है। दुग्ध समिति के माध्यम से महिलाओं को नियमित आय मिल रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
राज्य सरकार
धमतरी में डेयरी क्रांति : 6 हजार किसान परिवारों की बदली जिंदगी, महिलाएं बनीं उद्यमी
छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला अब धान उत्पादन के साथ डेयरी क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। जिला प्रशासन, एनडीडीबी और पशुपालकों के संयुक्त प्रयासों से दूध उत्पादन, संग्रहण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में प्रतिदिन 10 से 15 हजार लीटर दूध संग्रहित हो रहा है, जिसे 20 हजार लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। महिला पशुपालकों और दुग्ध समितियों की भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
राज्य सरकार
डेयरी कहानी : गिर-साहीवाल गायों से बदली किस्मत, महिलाओं को मिला रोजगार का सहारा
महासमुंद जिले में दुग्ध उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। ओडीओपी योजना के तहत डेयरी को बढ़ावा मिलने से 15 हजार से अधिक किसान और ग्रामीण परिवार इससे जुड़ चुके हैं। जोरातराई की महिलाओं ने डेयरी व्यवसाय को अपनाकर आर्थिक मजबूती की नई मिसाल पेश की है।
राज्य सरकार
दुग्ध क्रांति : 156 दुग्ध समितियों से किसानों को मिल रहा लाभ
महासमुंद जिले में पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय ग्रामीणों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभर रहा है। जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय देवभोग दुग्ध महासंघ और निजी डेयरियों के माध्यम से किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़
स्व-सहायता समूह से बदली तकदीर: डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल
छत्तीसगढ़ की माधुरी जंघेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर डेयरी, खेती और पशु आहार व्यवसाय के जरिए सालाना 5.50 लाख रुपये की आय हासिल की और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं।