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महेश कश्यप आधुनिक खेती करते हुए
महेश कश्यप आधुनिक खेती करते हुए

आधुनिक कृषि : तकनीकी खेती से आत्मनिर्भर बने किसान महेश कश्यप

छत्तीसगढ़ के बिल्हा क्षेत्र के किसान महेश कश्यप ने उद्यानिकी विभाग की सहायता और आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और जैविक खाद का उपयोग कर पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने सब्जी उत्पादन विशेषकर बैंगन के साथ अंतरवर्ती फसलों की खेती कर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ाई। इससे उनकी आय में दोगुनी वृद्धि हुई और वे अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 12 May 2026, 05:48 PM · अपडेट: 26 Oct 2026, 05:45 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत कछार निवासी महेश कश्यप आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं। कभी पारंपरिक खेती के कारण बढ़ती लागत और घटते लाभ से परेशान रहने वाले महेश ने उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक कृषि को अपनाया और अपनी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार किया। कश्यप पहले परंपरागत फसलों पर निर्भर थे, लेकिन उद्यानिकी विभाग की समेकित उद्यानिकी विकास योजना ने उनकी सोच और खेती का तरीका बदल दिया। 

विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण और फेंसिंग के लिए प्राप्त अनुदान का लाभ उठाकर सब्जी उत्पादन का उन्नत मॉडल तैयार किया। कश्यप ने अपने खेतों में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हुए तकनीकों को अपनाया। 

ड्रिप सिंचाई से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि फसल को सटीक पोषण मिला और खरपतवार की समस्या भी कम हुई। मिट्टी में नमी बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए मल्चिंग का प्रभावी उपयोग किया गया। वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ी है।

आय में दोगुनी वृद्धि और रिकॉर्ड उत्पादन

महेश ने बैंगन के साथ-साथ अंतरवर्ती फसल के रूप में कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती की। लगभग 4.5 एकड़ में बैंगन की खेती की है। उन्होंने बताया कि अनुमानित 900 से 1100 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है, जहाँ खेती में लगभग 7 से 8 लाख रुपये की लागत आई, वहीं सब्जियों की बिक्री से उन्हें 14 से 15 लाख रुपये की शुद्ध आर्थिक लाभ प्राप्त हुई। महेश कश्यप आज न केवल आत्मनिर्भर हुए हैं, बल्कि वे किसानों को संदेश दे रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग की यह पहल बिलासपुर के ग्रामीण अंचल में समृद्धि का नया अध्याय लिख रही है।

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