CHO Protest: ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) अब अपनी मांगों को लेकर आर-पार के मूड में आ गए हैं। अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समर्थन में आगामी 5 नवंबर को रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन का घेराव किया जाएगा। इस राज्यव्यापी आंदोलन को आरंग ब्लॉक के सीएचओ का भी पूरा समर्थन मिला है, और यहां से 32 अधिकारी इस प्रदर्शन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
स्थानीय स्तर पर तेज हुई तैयारियां
आंदोलन की तारीख नजदीक आते ही सरगर्मी बढ़ गई है। रायपुर जिला अध्यक्ष सरिता साहू और आरंग ब्लॉक अध्यक्ष प्रतिमा बंदे की ओर से प्रदेशभर के सीएचओ के नाम एक संयुक्त अपील जारी की गई है। इसमें सभी साथियों से आह्वान किया गया है कि वे अपने अधिकारों और समस्याओं के समाधान के लिए इस घेराव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचें और अपनी एकजुटता दिखाएं। पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है, ऐसे में अब संगठित होकर आवाज उठाना अनिवार्य हो गया है।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
CHO ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की रीढ़ हैं। वे न सिर्फ स्वास्थ्य केंद्रों में बैठकर मरीजों का इलाज करते हैं, बल्कि गर्भवती महिलाओं की जांच, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और शासन की तमाम योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने का जिम्मा भी संभालते हैं। चूंकि कई स्वास्थ्य केंद्रों की कमान अकेले सीएचओ के हाथों में ही है, इसलिए इस आंदोलन के दौरान उन केंद्रों पर ताले लटकने या सेवाएं बाधित होने की पूरी आशंका है। अधिकारियों के रायपुर जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच और प्राथमिक उपचार का काम प्रभावित हो सकता है, जिससे खासकर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।सबकी निगाहें शासन के अगले कदम पर
आरंग ब्लॉक से 32 सीएचओ के इस काफिले के शामिल होने से आंदोलन को स्थानीय स्तर पर एक नई मजबूती मिली है। अब सबकी निगाहें 5 नवंबर के प्रदर्शन और उसके बाद सरकार के रुख पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि इस बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद शासन सीएचओ की मांगों के निराकरण के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
रिपोर्ट - मोहनदास मानिकपुरी






