Arang News: दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही ग्रामीण इलाकों में उत्सव का माहौल बनने लगा है। गांवों में घरों की साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट का काम तेजी से चल रहा है। सुबह से शाम तक लोग अपने घरों को संवारने में जुटे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई दीपावली की तैयारियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है।
घरों की साफ-सफाई और रंगोली बनाने में जुटे परिवार
दीपावली पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने की परंपरा ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कायम है। लोग घरों की सफाई के साथ दीवारों पर चूना, गेरू और नए रंगों से पुताई कर रहे हैं। महिलाएं आंगन की लिपाई-पुताई और रंगोली बनाने की तैयारी में लगी हैं। वहीं, परिवार के अन्य सदस्य भी साफ-सफाई और सजावट के काम में हाथ बंटा रहे हैं। गांवों में घर-घर चल रही तैयारियों से त्योहार की रौनक साफ नजर आने लगी है।
मिट्टी के दीयों और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों से सजे बाजार
ग्रामीण क्षेत्रों के बड़े गांवों और कस्बों में लगने वाले बाजारों में दीपावली की खरीदारी शुरू हो गई है। मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजा सामग्री और सजावटी सामान की दुकानें ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। कुम्हारों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक दीयों की भी अच्छी मांग दिखाई दे रही है। आधुनिक सजावटी लाइटों के बीच लोग मिट्टी के दीये खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। इससे स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को भी त्योहार के दौरान अच्छी बिक्री की उम्मीद है।पटाखों की दुकानों पर बच्चों की भीड़, बाजारों में बढ़ी चहल-पहल
दीपावली को लेकर बच्चों और युवाओं में खास उत्साह है। गांवों और कस्बों में लगी पटाखों की दुकानों पर खरीदार पहुंच रहे हैं। सुबह से देर शाम तक बाजारों में लोगों की आवाजाही बनी हुई है। वहीं, फसल के मौसम और त्योहार की खुशियों ने ग्रामीण परिवेश में अलग ही उत्साह भर दिया है। घरों से लेकर बाजारों तक दीपावली की तैयारियां दिखाई देने लगी हैं। पारंपरिक रीति-रिवाजों, मिट्टी के दीयों और आपसी मेल-मिलाप के साथ ग्रामीण अंचलों में दीपोत्सव का उल्लास बढ़ता जा रहा है।
रिपोर्ट - मोहनदास मानिकपुरी







