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इंटरनेट की जंग तेज : स्टारलिंक और Jio के बीच “देसी बनाम ग्लोबल” मुकाबला

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की रेस तेज हो गई है, जहां Starlink और Reliance Jio आमने-सामने हैं। जिओ अपने “देसी स्टारलिंक” प्रोजेक्ट के तहत लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क बनाकर देश के दूर-दराज इलाकों तक हाई-स्पीड और किफायती इंटरनेट पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। वहीं Starlink पहले से कई देशों में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा दे रही है। यह मुकाबला भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और इंटरनेट की दुनिया को बदलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 06 May 2026, 05:29 PM · अपडेट: 04 Oct 2026, 05:10 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की रेस तेज हो गई है, जहां एक तरफ एलन मस्क की स्पेस ऐक्स की स्टारलिंक है, वहीं दूसरी तरफ मुकेश अंबानी की रिलायंश  इंडस्ट्री लिमिटेड अब “देसी स्टारलिंक” लाने की बड़ी तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मुकाबला अब सिर्फ टेलीकॉम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे स्पेस इंटरनेट यानी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड तक पहुंच गया है।

जिओ  का बड़ा प्लान 

रिलायंश जिओ इन्फोकॉम लिमिटेड अपनी डिजिटल यूनिट जिओ प्लेट फ्रॉम के तहत लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य भारत के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है, जहां अभी फाइबर या मोबाइल नेटवर्क कमजोर है।  कंपनी का फोकस एक ऐसा सैटेलाइट सिस्टम तैयार करने पर है जो स्टारलिंककी तरह ही तेजी से इंटरनेट उपलब्ध कराए, लेकिन भारत की जरूरतों के हिसाब से सस्ता और ज्यादा किफायती हो।

क्या है स्टारलिंक 

स्पेस ऐक्स  की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक एक हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा में घूम रहे हजारों छोटे सैटेलाइट्स के जरिए इंटरनेट सुविधा प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य उन इलाकों तक तेज इंटरनेट पहुंचाना है, जहां फाइबर केबल या मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नहीं है, जैसे दूर-दराज के गांव, पहाड़ी क्षेत्र और समुद्री इलाके। 
स्टारलिंक की खास बात यह है कि यह पारंपरिक इंटरनेट की तुलना में कम लेटेंसी के साथ तेज स्पीड इंटरनेट देने की क्षमता रखता है। यूजर्स को इसके लिए एक छोटी डिश और राउटर की जरूरत होती है, जो सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होकर इंटरनेट प्रदान करता है। स्टारलिंक पहले से ही दुनिया के कई देशों में सैटेलाइट इंटरनेट दे रही है और लाखों यूजर्स को जोड़ चुकी है। अब जिओ का लक्ष्य है कि वह भारत में इसका मजबूत विकल्प बने और “इंडिया का अपना स्टारलिंक” तैयार करे।

प्रोजेक्ट की खास बातें

रिलायंश जिओ का सैटेलाइट इंटरनेट प्रोजेक्ट भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स का उपयोग किया जाएगा, जो पृथ्वी के करीब घूमकर तेज और स्थिर इंटरनेट सेवा प्रदान करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य देश के उन दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है, जहां अभी तक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर कनेक्टिविटी की सुविधा सीमित है। 
यह तकनीक कम लेटेंसी के साथ तेज इंटरनेट स्पीड देने में सक्षम होगी, जिससे वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और गेमिंग जैसे काम और भी बेहतर हो जाएंगे। साथ ही इसे Jio के मौजूदा 4G और 5G नेटवर्क के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे एक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम तैयार होगा। कंपनी का लक्ष्य इस सेवा को किफायती बनाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है, जिससे भारत के डिजिटल विकास को नई गति मिल सके।

निवेश और रणनीति

सैटेलाइट इंटरनेट प्रोजेक्ट एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर योजना है, जिसमें कंपनी हजारों करोड़ रुपये का भारी निवेश करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रोजेक्ट कई अरब डॉलर का हो सकता है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग हजारों करोड़ से लेकर अधिक तक पहुंच सकता है। इस बजट का बड़ा हिस्सा सैटेलाइट लॉन्चिंग, लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करने, ग्राउंड स्टेशन बनाने और पूरे देश में हाई-स्पीड इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में खर्च किया जाएगा। चूंकि यह तकनीक बेहद एडवांस और महंगी है, इसलिए इसका कुल खर्च काफी बड़ा माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत में “देसी स्टारलिंक” जैसा सिस्टम तैयार करना है, जो दूर-दराज के इलाकों में भी तेज और किफायती इंटरनेट सेवा उपलब्ध करा सके।
यह रेस आने वाले समय में भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल सकती है। एक तरफ ग्लोबल दिग्गज स्टारलिंक है, जो दुनिया के कई देशों में सैटेलाइट इंटरनेट की सुविधा दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ रिलायंश जिओ अपने “देसी स्टारलिंक” प्रोजेक्ट के जरिए भारत में सस्ती और तेज सैटेलाइट इंटरनेट सेवा लाने की तैयारी कर रहा है। अगर यह प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ती है, तो इसका सीधा फायदा आम यूजर्स को मिलेगा और देश के दूर-दराज इलाकों तक भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंच सकेगा, जिससे भारत का डिजिटल भविष्य और मजबूत हो जाएगा।
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