केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी रामदास विसलावथ ने अक्टूबर 2019 में टाटा AIA लाइफ इंश्योरेंस से 1 करोड़ रुपये का बीमा लिया था। मई 2021 में कोविड-19 से उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी ने डेथ क्लेम के तौर पर 1 करोड़ रुपये मांगे।
क्लेम की जांच में टाटा AIA को पता चला कि रामदास ने पहले ICICI प्रूडेंशियल से भी 1 करोड़ रुपये की पॉलिसी के लिए आवेदन किया था। कंपनी के अनुसार, मेडिकल जांच के बाद उस प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया था। टाटा AIA के फॉर्म में इस जानकारी के बारे में पूछे जाने पर रामदास ने 'नहीं' जवाब दिया था।
कंपनी ने क्लेम किया था खारिज
बीमा कंपनी ने इसे महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना माना और क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी ने पॉलिसी भी रद्द कर दी और जमा प्रीमियम वापस कर दिया। इसके बाद परिवार ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
आयोग ने कहा- ठोस सबूत जरूरी
तेलंगाना राज्य उपभोक्ता आयोग ने कहा कि केवल जानकारी छिपाने का आरोप लगाकर क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। बीमा कंपनी को यह साबित करना होगा कि पॉलिसीधारक ने जानबूझकर जानकारी छिपाई थी। आयोग ने यह भी पाया कि टाटा AIA ने पॉलिसी जारी करने से पहले खुद रामदास का मेडिकल टेस्ट कराया था और उन्हें फिट पाया था।
टाटा AIA फैसले को देगी चुनौती
टाटा AIA ने कहा है कि वह इस फैसले को नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। कंपनी का कहना है कि पुराने बीमा प्रस्ताव के स्थगित होने और मेडिकल निष्कर्षों की जानकारी महत्वपूर्ण थी, जिसका खुलासा किया जाना चाहिए था।
1 करोड़ के साथ ब्याज और मुआवजा
आयोग ने जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखते हुए टाटा AIA को 1 करोड़ रुपये का डेथ क्लेम 9% वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया। इसके अलावा परिवार को 50 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च भी देना होगा।


