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काली पट्टी बांध कर बैठे शिक्षक
काली पट्टी बांध कर बैठे शिक्षक
छत्तीसगढ़

18 अप्रैल को प्रदेशभर में स्कूल बंद : आरटीई प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग पर निजी स्कूलों का आंदोलन तेज

महासमुंद में आरटीई के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर निजी स्कूल संचालकों का आंदोलन तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के नेतृत्व में स्कूलों के शिक्षकों और संचालकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। संचालकों का कहना है कि 2011 से तय दरों के अनुसार कक्षा 1 से 5 तक 7,000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष मिलते हैं, जो बढ़ती महंगाई और शैक्षणिक खर्चों के मुकाबले काफी कम हैं। साथ ही भुगतान में देरी और जटिल प्रक्रियाओं से भी परेशानी हो रही है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 17 Apr 2026, 07:20 PM · अपडेट: 18 Jul 2026, 06:07 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

महासमुंद जिले में आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेशित बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि की मांग को लेकर निजी स्कूल संचालकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के नेतृत्व में जिले सहित प्रदेशभर के निजी स्कूलों में विरोध-प्रदर्शन का स्वरूप अब और व्यापक हो गया है। इसी क्रम में आज जिले के सभी निजी स्कूलों के संचालकों एवं शिक्षकों ने प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराते हुए काली पट्टी बांधकर अपने-अपने स्कूलों में कार्य किया। इस दौरान शिक्षण कार्य सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन काली पट्टी के माध्यम से उन्होंने शासन के प्रति अपना असंतोष और विरोध जताया। स्कूल संचालकों का कहना है कि यह कदम सरकार का ध्यान लंबे समय से लंबित उनकी मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए उठाया गया है।

पदाधिकारियों का कथन

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि 14 अप्रैल को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में आंदोलन को और अधिक तेज करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। इसी निर्णय के तहत आगे की रणनीति तैयार की गई है, जिसमें चरणबद्ध आंदोलन और पूर्ण शैक्षणिक बंद जैसी स्थितियां शामिल हैं।उन्होंने जानकारी दी कि इस आंदोलन की औपचारिक सूचना राज्य के शिक्षा मंत्री को भी भेज दी गई है, ताकि शासन स्तर पर इस विषय पर जल्द ही निर्णय लिया जा सके। एसोसिएशन का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से आरटीई के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि में संशोधन और बढ़ोतरी की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार वर्ष 2011 में तय दरों के आधार पर निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति दी जाती है। इसके तहत कक्षा पहली से पांचवीं तक प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष 7,000 रुपये तथा कक्षा छठवीं से आठवीं तक 11,400 रुपये की राशि शासन द्वारा दी जाती है। स्कूल संचालकों का कहना है कि पिछले लगभग 14 वर्षों में इस राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान शिक्षा से जुड़ी सभी लागतों—जैसे शिक्षक वेतन, भवन रखरखाव, बिजली, पाठ्य सामग्री और अन्य प्रशासनिक खर्चों—में कई गुना वृद्धि हो चुकी है।

निजी स्कूल संचालकों का तर्क है कि वर्तमान में मिल रही प्रतिपूर्ति राशि से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना लगातार कठिन होता जा रहा है। कई स्कूलों का कहना है कि आर्थिक दबाव के कारण संसाधनों की कमी महसूस की जा रही है, जिसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इसके अलावा एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रतिपूर्ति राशि के भुगतान में अक्सर देरी होती है और प्रक्रिया भी काफी जटिल है। इससे स्कूलों की वित्तीय व्यवस्था प्रभावित होती है और संचालन में बाधाएं आती हैं।

बंद का ऐलान

आंदोलन की आगे की रूपरेखा के तहत एसोसिएशन ने पहले ही 1 मार्च से असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया था। इसके बाद 4 अप्रैल को यह भी निर्णय लिया गया था कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो लॉटरी प्रक्रिया के तहत चयनित आरटीई छात्रों को प्रवेश देने से भी इनकार किया जा सकता है। हालांकि यह निर्णय भी सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। इसी कड़ी में अब 18 अप्रैल को प्रदेश सहित महासमुंद जिले के सभी निजी स्कूल पूर्णतः बंद रखने का ऐलान किया गया है। इस दिन सभी शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप रहेंगी और इसे आंदोलन का एक बड़ा चरण माना जा रहा है।

एसोसिएशन ने सरकार से यह भी मांग की है कि आरटीई अधिनियम की धारा 12 (उपधारा 2) के तहत सरकारी स्कूलों में प्रति विद्यार्थी पर होने वाले वास्तविक खर्च का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाए। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता आएगी और निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि का यथार्थ और वैज्ञानिक आधार पर पुनर्निर्धारण किया जा सकेगा। कुल मिलाकर, निजी स्कूल संचालकों का यह आंदोलन अब एक निर्णायक चरण की ओर बढ़ता दिख रहा है, जिसमें वे शासन से स्पष्ट नीति और प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी की मांग को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं।

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