बिलासपुर शहर में रसोई गैस एजेंसियों की मनमानी और कालाबाजारी का दायरा लगातार फैलता जा रहा है। मगरपारा की बालाजी एजेंसी में सामने आई गड़बड़ियों के बाद अब तारबाहर स्थित विनोद गैस एजेंसी से फर्जीवाड़े का एक नया मामला उजागर हुआ है। यहां एक उपभोक्ता ने पूरे साल में केवल तीन गैस सिलेंडर रिफिल कराए, लेकिन जब उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल जांचा तो उनके नाम पर 10 सिलेंडर जारी होना दर्ज मिला। मामले के पीड़ित अधिवक्ता मनीष मिश्रा हैं। उन्होंने एजेंसी पर सीधे तौर पर नाम का दुरुपयोग कर सिलेंडर की कालाबाजारी करने का आरोप लगाया है।
रिकॉर्ड में नाम किसी का सिलेंडर किसी को
मनीष का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन डेटा देखने के बाद जब अपने स्तर पर पड़ताल की, तो पता चला कि बाकी के सात सिलेंडर किसी और को ऊंचे दामों पर बेच दिए गए और रिकॉर्ड में डिलीवरी उनके नाम चढ़ा दी गई। धांधली की पुष्टि होने के बाद पीड़ित उपभोक्ता ने साक्ष्यों के साथ खाद्य विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और एजेंसी संचालक समेत कर्मचारियों पर धोखाधड़ी की प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
अधिकांश एजेंसियों में फर्जी रिफिलिंग का मामला
शिकायत के बाद विभाग का रवैया टालमटोल वाला रहा है। आरोप है कि खाद्य विभाग ने मामले को शांत करने के लिए जांच टीम तो बनाई, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और न ही एजेंसी के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम उठाया गया। बिलासपुर की अधिकांश एजेंसियों में आम उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी रिफिलिंग दर्ज कर कमर्शियल इस्तेमाल या कालाबाजारी के लिए सिलेंडर निकालने का खेल चल रहा है। झंझट और दफ्तरी चक्करों के डर से ज्यादातर लोग आवाज नहीं उठाते, जिसका फायदा संचालक उठा रहे हैं।
प्रशासन जल्द सख्त कदम नहीं उठाता तो जाऊंगा अदालत
"मैंने एजेंसी से सिर्फ 3 सिलेंडर लिए हैं, जबकि रिकॉर्ड में 10 दर्ज हैं। यह साफ-साफ धोखाधड़ी है। खाद्य विभाग में साक्ष्य देने के बाद भी कार्रवाई रुकी हुई है। अगर प्रशासन ने जल्द सख्त कदम नहीं उठाया, तो मैं इस मामले को लेकर सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा।" — मनीष मिश्रा, पीड़ित उपभोक्ता व अधिवक्ता
शहर में लगातार दूसरे बड़े मामले के सामने आने के बाद भी विभागीय चुप्पी पर अब सवाल उठने लगे हैं। यदि समय रहते इन एजेंसियों का ऑडिट नहीं किया गया, तो आम जनता के हक पर यह डाका ऐसे ही पड़ता रहेगा।