जगदलपुर के अड़ावाल गांव में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ‘तेंदुए’ के वीडियो ने ग्रामीणों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया। वीडियो में एक घर के सीसीटीवी कैमरे में तेंदुए जैसे वन्यजीव के दिखाई देने का दावा किया गया था। देखते ही देखते यह वीडियो तेजी से अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल गया, जिसके बाद गांव और आसपास के इलाकों में लोगों में चिंता बढ़ गई। ग्रामीणों ने वीडियो को वास्तविक मानते हुए वन्यजीव के गांव में आने की आशंका जताई। कई लोगों ने इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू कर दीं, जिससे इलाके में अफवाहों का माहौल बनने लगा।
वन विभाग ने शुरू की जांच
मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग हरकत में आया और तत्काल जांच शुरू की गई। यह पूरा मामला जगदलपुर के माचकोट वन परिक्षेत्र अंतर्गत अड़ावाल गांव का बताया जा रहा है। वन विभाग की टीम ने वायरल वीडियो की तकनीकी जांच के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी जानकारी जुटाई। जांच के दौरान अधिकारियों को वीडियो में कई संदिग्ध बातें नजर आईं। इसके बाद तकनीकी विश्लेषण से पुष्टि हुई कि वायरल वीडियो वास्तविक नहीं था, बल्कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से तैयार किया गया था।
युवक तक पहुंची टीम
वन विभाग ने मामले में तेजी दिखाते हुए वीडियो बनाने वाले युवक की पहचान कर ली। अधिकारियों की टीम महज एक घंटे के भीतर युवक तक पहुंच गई और उसे पूछताछ के लिए माचकोट वन परिक्षेत्र कार्यालय बुलाया गया। पूछताछ के दौरान युवक ने स्वीकार किया कि उसने यह वीडियो केवल मजाक के उद्देश्य से बनाया था। उसने बताया कि उसका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में डर फैल गया।युवक ने मानी गलती
वन अधिकारियों ने ग्रामीणों की मौजूदगी में युवक को समझाइश दी। युवक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए वन विभाग और ग्रामीणों से माफी मांगी। अधिकारियों ने उसे बताया कि वन्यजीवों से जुड़ी झूठी जानकारी या फर्जी वीडियो फैलाने से लोगों में अनावश्यक भय पैदा होता है और इससे वन विभाग के काम में भी परेशानी आती है। चूंकि युवक की यह पहली गलती थी, इसलिए फिलहाल उसे सख्त चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। विभाग ने भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा न करने की हिदायत दी है।
सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों और आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर आने वाले वन्यजीवों से जुड़े किसी भी वीडियो या सूचना को बिना पुष्टि किए आगे शेयर न करें। अधिकारियों ने कहा कि AI तकनीक के जरिए अब आसानी से फर्जी वीडियो बनाए जा सकते हैं, इसलिए किसी भी जानकारी की सत्यता जांचना जरूरी है। वन्यजीवों से संबंधित किसी भी सूचना के लिए लोग सीधे वन विभाग से संपर्क करें, ताकि सही जानकारी समय पर मिल सके।