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Ayushman Bharat card and fertility treatment concept (Image Source: AI Photo)
Ayushman Bharat card and fertility treatment concept (Image Source: AI Photo)
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Ayushman Bharat Yojana: महिलाओं की बड़ी सर्जरीज का सहारा, लेकिन मां बनने के सपने पर फर्टिलिटी और IVF इलाज का खर्च जेब से

Ayushman Bharat Yojana: गंभीर बीमारियों और महिलाओं की कई सर्जरी के इलाज में आर्थिक मदद देती है, लेकिन IVF, ART और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट जैसी प्रक्रियाएं अभी भी इसके कवरेज में शामिल नहीं हैं। ऐसे में संतान प्राप्ति के लिए इलाज करा रहे दंपतियों को महंगे उपचार का खर्च खुद उठाना पड़ रहा है।

प्रकाशित: 23 Sep 2026, 11:47 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Ayushman Bharat Yojana: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) देश की करोड़ों महिलाओं को गंभीर बीमारियों और जटिल सर्जरीज के लिए बड़ा वित्तीय संबल दे रही है। हालांकि, जिन दंपतियों को संतान सुख पाने में अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें इस योजना से कोई सीधी राहत नहीं मिल पा रही है। फर्टिलिटी ट्रीटमेंट और आईवीएफ (IVF) जैसी आधुनिक चिकित्सा प्रक्रियाएं इस योजना के दायरे से पूरी तरह बाहर रखी गई हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) की गाइडलाइंस के मुताबिक, आयुष्मान कार्ड पर साधारण ओपीडी परामर्श के साथ-साथ फर्टिलिटी और बांझपन (Infertility) से जुड़े इलाज कवर नहीं होते। ऐसे में माता-पिता बनने की उम्मीद जगाने वाली इन महंगी प्रक्रियाओं का पूरा वित्तीय बोझ मरीजों और उनके परिवारों को खुद ही उठाना पड़ रहा है।

गंभीर बीमारियों और सर्जरीज के लिए तय हैं फिक्स्ड पैकेज 

एक तरफ जहां गर्भधारण में मदद करने वाले इलाज इस दायरे से बाहर हैं, वहीं महिलाओं की अन्य गंभीर शारीरिक समस्याओं के इलाज के लिए आयुष्मान में कई राहत पैकेज मौजूद हैं। बच्चेदानी या अंडाशय से जुड़ी विभिन्न जटिलताओं के लिए इसमें बाकायदा सर्जिकल खर्च कवर किया जाता है। अगर किसी महिला को बच्चेदानी में गांठ (फाइब्राइड) है या फिर स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर बच्चेदानी निकालने (हिस्टरेक्टॉमी) की जरूरत पड़ती है, तो इसका खर्च योजना से मिल जाता है।
  • फाइब्राइड हटाने का इलाज: एब्डामिनल मायोमेक्टॉमी के लिए ₹20,000 और हिस्टेरोस्कोपिक मायोमेक्टॉमी के लिए ₹18,000 तक का पैकेज है।
  • बच्चेदानी निकालने की सर्जरी: एब्डामिनल, नॉन-डिसेंट वेजाइनल, लेप्रोस्कोपिक या LAVH जैसी सर्जरीज के लिए लगभग ₹20,000 की वित्तीय मदद का प्रावधान है।

  • अन्य सर्जरीज: फैलोपियन ट्यूब और ओवरी (अंडाशय) से संबंधित गंभीर बीमारियों के लिए भी आयुष्मान भारत में तय पैकेज की सुविधा दी गई है।

  • इलाज के नियम तय, पर जेब पर भारी पड़ रही एआरटी और IVF की राह 

    गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए मरीजों को कई चरणों से होकर गुजरना पड़ता है। इसमें प्रारंभिक जांच और दवाओं से लेकर असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और IVF जैसे महंगे कदम उठाने पड़ते हैं। आईसीएमआर (ICMR) ने महिलाओं में बांझपन के सही इलाज के लिए मानक दिशानिर्देश (Standard Treatment Workflows) तो तय किए हैं, लेकिन आयुष्मान भारत के सामान्य फंड में यह प्रक्रिया शामिल न होने से जरूरतमंद दंपतियों की परेशानी बनी हुई है।

    आयुष्मान भारत योजना में किन-किन सुविधाओं पर नहीं मिलता कवरेज?

    योजना के नियमों के तहत अस्पताल में भर्ती हुए बिना या कुछ विशिष्ट चिकित्सा श्रेणियों को आयुष्मान कार्ड की परिधि से दूर रखा गया है:

    1. फर्टिलिटी व कंसीविंग ट्रीटमेंट: गर्भधारण में आ रही समस्याओं के निवारण से संबंधित प्रक्रियाएं।

    2. IVF और ART सेवाएं: इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी सर्जिकल व मेडिकल प्रक्रियाएं।

    3. सामान्य ओपीडी सेवाएं: बिना अस्पताल में भर्ती हुए डॉक्टर को दिखाना, परामर्श लेना व दवाएं।

    4. कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट: केवल शारीरिक बनावट या सुंदरता निखारने के उद्देश्य से कराई जाने वाली प्लास्टिक सर्जरीज।

    5. ड्रग रिहैबिलिटेशन: नशे और लत से मुक्ति दिलाने के लिए दी जाने वाली विशेष चिकित्सा सेवाएं।

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