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Bawana school abuse case (Image Source: AI Genrated)
Bawana school abuse case (Image Source: AI Genrated)
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Bawana school case: 3 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न, सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल

Bawana school case: 3 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के मामले की जांच में DCPCR को स्कूल की सुरक्षा, मान्यता और रिकॉर्ड में गंभीर खामियां मिलीं। आरोपी ड्राइवर का नाम रजिस्टर में नहीं था और POCSO रजिस्टर में भी घटना की एंट्री नहीं मिली।

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प्रकाशित: 03 Sep 2026, 06:31 PM · अपडेट: 14 Oct 2026, 12:11 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

Bawana school case: बवाना के एक स्कूल में 3 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) ने स्कूल की व्यवस्थाओं और प्रबंधन की कार्यप्रणाली की जांच शुरू कर दी है। आयोग के चेयरपर्सन ओम प्रकाश व्यास के नेतृत्व में टीम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ स्कूल का औचक निरीक्षण किया।

जांच के दौरान बच्चों की सुरक्षा, स्कूल की मान्यता और रिकॉर्ड से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आने का दावा किया गया है। DCPCR चेयरपर्सन के मुताबिक, बच्ची के माता-पिता ने 20 अगस्त को ही स्कूल प्रबंधन से शिकायत की थी, लेकिन आरोप है कि प्रबंधन की ओर से मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

बिना मान्यता चल रहा था स्कूल

24 अगस्त को बच्ची के परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद मामला सामने आया। बिना मान्यता चल रहा था स्कूल निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम को पता चला कि बवाना स्थित स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहा था। आयोग ने स्कूल की प्रशासनिक व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों पर भी सवाल उठाए हैं।

शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल प्रबंधन को इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अब स्कूल से मान्यता, संचालन और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित दस्तावेजों के बारे में जवाब मांगा गया है। बाकी बच्चों की भी होगी काउंसलिंग DCPCR चेयरपर्सन ओम प्रकाश व्यास ने बताया कि आयोग को आशंका है कि जिस ड्राइवर पर आरोप लगा है, उसने अन्य बच्चों के साथ भी कोई आपत्तिजनक हरकत की हो सकती है। 

बाकी बच्चों की होगी काउंसलिंग

आयोग को आशंका है कि आरोपी ड्राइवर ने स्कूल के किसी अन्य बच्चे के साथ भी आपत्तिजनक व्यवहार किया हो सकता है। इसे देखते हुए स्कूल में पढ़ने वाले दूसरे बच्चों की भी काउंसलिंग कराई जाएगी। इसके जरिए यह जानने की कोशिश होगी कि कहीं किसी अन्य बच्चे के साथ भी ऐसी कोई घटना तो नहीं हुई। बच्चों से बातचीत के दौरान उनकी सुरक्षा और मानसिक स्थिति का ध्यान रखा जाएगा। अगर किसी बच्चे की ओर से कोई शिकायत सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी पर 7 केस, फिर भी नाम नहीं

स्कूल के रजिस्टर में आरोपी ड्राइवर का नाम ही नहीं जांच में सामने आई सबसे गंभीर बातों में से एक आरोपी ड्राइवर से जुड़ी है। DCPCR चेयरपर्सन के मुताबिक, पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले से 7 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें लूटपाट का मामला भी शामिल है।

इसके बावजूद निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम को स्कूल के रजिस्टर में आरोपी ड्राइवर का नाम नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्कूल में वह किस हैसियत से बच्चों के संपर्क में था और उसकी नियुक्ति या प्रवेश से जुड़े रिकॉर्ड कहां हैं। 

POCSO रजिस्टर में भी घटना की एंट्री नहीं आयोग की जांच में स्कूल के POCSO रजिस्टर को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं।

DCPCR ने किया औचक निरीक्षण

बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में स्कूल स्तर पर शिकायत और सुरक्षा प्रक्रिया का पालन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शिकायत मिलने के बाद भी रिकॉर्ड में घटना का उल्लेख नहीं होना स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। मंगलवार को मिली जानकारी, अगले दिन पहुंची टीम DCPCR चेयरपर्सन ने बताया कि आयोग को बवाना की घटना की जानकारी मंगलवार को मिली थी। 

उसी दिन स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेजा गया। आज आयोग की टीम ने बिना पूर्व सूचना के स्कूल पहुंचकर निरीक्षण किया। औचक निरीक्षण के दौरान स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ से संबंधित रिकॉर्ड, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज और POCSO रजिस्टर समेत अन्य व्यवस्थाओं की जांच की गई

पुलिस और DCPCR की जांच जारी

आयोग अब यह भी जांच कर रहा है कि बवाना स्थित स्कूल और उसकी दूसरी ब्रांच के बीच प्रशासनिक एवं संचालन संबंध किस तरह के हैं। साथ ही, दोनों संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्धारित नियमों और उनकी पालना की भी पड़ताल की जा रही है। पूरे मामले में स्कूल प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में है। बच्ची के परिजनों की ओर से समय पर शिकायत किए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने, POCSO रजिस्टर में घटना की एंट्री न मिलने, स्कूल के बिना मान्यता संचालित होने और आरोपी ड्राइवर का नाम रजिस्टर में दर्ज नहीं होने जैसी बातों ने स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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