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मोतियाबिंद से बचाव और आंखों की देखभाल टिप्स
मोतियाबिंद से बचाव और आंखों की देखभाल टिप्स
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मोतियाबिंद : देखभाल में बरतें सावधानी, बढ़ती उम्र में आंखों की सेहत का रखें खास ख्याल

मोतियाबिंद अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। डायबिटीज, धूम्रपान, प्रदूषण, ज्यादा स्क्रीन टाइम और खराब जीवनशैली के कारण कम उम्र में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। स्वस्थ आदतें जैसे यूवी किरणों से बचाव, संतुलित आहार, ब्लड शुगर नियंत्रण, धूम्रपान से दूरी और नियमित आंखों की जांच से मोतियाबिंद की बढ़ती रफ्तार को कम किया जा सकता है। हालांकि, गंभीर स्थिति में सर्जरी ही इसका प्रभावी इलाज है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
03 Aug 2026, 03:17 PM
नई दिल्ली

मोतियाबिंद आजकल कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रहा है। डायबिटीज, धूम्रपान, प्रदूषण, ज्यादा स्क्रीन टाइम और खराब जीवनशैली इसके खतरे को बढ़ा रहे हैं। इसमें आंख के प्राकृतिक लेंस में धुंधलापन आने लगता है, जिससे धीरे-धीरे नजर कमजोर होने लगती है। हालांकि स्वस्थ आदतों से इसकी रफ्तार को कम किया जा सकता है। आंख का प्राकृतिक लेंस प्रोटीन और पानी से बना होता है। उम्र बढ़ने के साथ लेंस में मौजूद प्रोटीन में बदलाव होने लगता है, जिससे वह धुंधला होने लगता है। इसके अलावा डायबिटीज, आंखों में चोट, लंबे समय तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल, यूवी किरणों का ज्यादा संपर्क और धूम्रपान भी मोतियाबिंद के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

मोतियाबिंद का खतरा घटाएं

मोतियाबिंद को पूरी तरह खत्म करने का कोई घरेलू उपाय नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से इसके बढ़ने की गति को कम किया जा सकता है। पौष्टिक भोजन, आंखों की सुरक्षा और नियमित जांच आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है। सूरज की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें आंखों के लेंस को नुकसान पहुंचा सकती हैं। लंबे समय तक धूप में रहने वालों को यूवी400 सुरक्षा वाले सनग्लासेस और टोपी का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आंखों को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके।

डायबिटीज कंट्रोल रखें

लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर आंखों के लेंस में बदलाव ला सकता है। डायबिटीज मरीजों को नियमित जांच, संतुलित आहार और ब्लड शुगर नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जिससे आंखों से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो सके। हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, टमाटर, शिमला मिर्च, फल, बादाम और अखरोट जैसे खाद्य पदार्थ आंखों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। इनमें मौजूद विटामिन सी, विटामिन ई, ल्यूटिन और जिएक्सैंथिन आंखों को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकते हैं।

आंखों के लिए भी फायदेमंद

सिगरेट का धुआं शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ाता है, जो आंखों के लेंस को नुकसान पहुंचा सकते हैं। धूम्रपान छोड़ने से न सिर्फ आंखों बल्कि हृदय और फेफड़ों की सेहत को भी फायदा मिलता है। बढ़ती उम्र के साथ मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है। 40 वर्ष के बाद नियमित नेत्र जांच कराने से बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है और डॉक्टर सही समय पर इलाज की सलाह दे सकते हैं।

लंबे समय तक इस्तेमाल न करें

लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं, इंजेक्शन या आई ड्रॉप्स का उपयोग कुछ लोगों में मोतियाबिंद का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए इन्हें हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इस्तेमाल करना चाहिए। मोतियाबिंद उम्र बढ़ने के साथ होने वाली सामान्य समस्या है, लेकिन कई जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है। यूवी सुरक्षा, बेहतर खानपान, ब्लड शुगर नियंत्रण, धूम्रपान से दूरी और नियमित आंखों की जांच से आंखों की सेहत को बेहतर बनाए रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर सर्जरी ही इसका सबसे प्रभावी इलाज है।

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