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Cattle rearing has become a source of better income. (Image Source: CGDPR)
Cattle rearing has become a source of better income. (Image Source: CGDPR)
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Chhattisgarh Agriculture: कृत्रिम गर्भाधान से बदली दयासागर की किस्मत, गौपालन बना बेहतर आय का जरिया

Chhattisgarh Agriculture: सरगुजा जिले के सीतापुर विकासखंड के ग्रामीण पशुपालक दयासागर ने पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में कृत्रिम गर्भाधान और बेहतर प्रबंधन अपनाकर अपने पारंपरिक गौपालन को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है। नस्ल सुधार के बाद उनके दूध उत्पादन में वृद्धि हुई और परिवार की आय को मजबूती मिली।

प्रकाशित: 18 Sep 2026, 05:49 PM · अपडेट: 19 Sep 2026, 09:23 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarh Agriculture: सेवा संकल्प और जनसेवा की पहल का असर ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक आजीविका को नई दिशा देने के रूप में भी दिखाई दे रहा है। सरगुजा जिले के सीतापुर विकासखंड के ग्राम चलता निवासी दयासागर ने पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन को अपनाकर अपने पारंपरिक गौपालन को अधिक लाभकारी बनाया है। विभाग की सलाह पर कृत्रिम गर्भाधान (एआई) के माध्यम से नस्ल सुधार अपनाने और पशुओं के बेहतर प्रबंधन से उनके दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई है। इससे उनकी नियमित आमदनी बढ़ी और परिवार की आजीविका को मजबूती मिली है।
दयासागर कई वर्षों से देसी गायों का पालन करते आ रहे थे। पशुपालन विभाग के अधिकारियों एवं मैदानी अमले ने उन्हें कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार की जानकारी दी। विभागीय सलाह पर उन्होंने अपनी गायों में एआई कराया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें बेहतर नस्ल के बछड़े-बछिया प्राप्त हुए। वर्तमान में उनके पास एचएफ, गिर और साहीवाल जैसी नस्लों की गायें भी हैं।

दुग्ध उत्पादन बढ़ा, आमदनी को मिला सहारा

नस्ल सुधार के साथ दयासागर ने पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में पशुओं की देखभाल, पोषण और बेहतर प्रबंधन पर भी ध्यान दिया। इसका सकारात्मक असर दुग्ध उत्पादन पर पड़ा। दयासागर के अनुसार, अब उनके यहां प्रतिदिन लगभग 15 से 20 लीटर तक दूध का उत्पादन हो रहा है। बढ़े हुए दुग्ध उत्पादन से नियमित आमदनी में वृद्धि हुई है, जिससे परिवार के दैनिक खर्च पूरे करने के साथ बचत करना भी संभव हो रहा है। दयासागर बताते हैं, “मैं कई वर्षों से देसी गायों का पालन कर रहा था। पशु विभाग के अधिकारियों ने एआई के बारे में जानकारी दी और उनकी सलाह पर एआई कराया। इससे मुझे अच्छी नस्ल के पशु प्राप्त हुए। विभाग की ओर से समय-समय पर मिलने वाली सलाह से पशुपालन में काफी सुविधा हुई है। पहले की तुलना में अब दूध का उत्पादन और आमदनी दोनों बढ़े हैं। इससे परिवार का खर्च चलाने के साथ बचत भी हो रही है।”

पारंपरिक गौपालन से टिकाऊ आय की ओर

पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से दयासागर अब नस्ल सुधार के साथ पशुओं के बेहतर प्रबंधन और आधुनिक पशुपालन तकनीकों को भी अपना रहे हैं। अपने अनुभव से वे अन्य ग्रामीणों को भी वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि उचित देखभाल, नस्ल सुधार और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से पशुपालन को नियमित एवं टिकाऊ आय का माध्यम बनाया जा सकता है। दयासागर की कहानी यह दर्शाती है कि तकनीकी मार्गदर्शन और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सेवाओं का सही उपयोग पारंपरिक पशुपालन को अधिक लाभकारी आजीविका में बदल सकता है। नस्ल सुधार, बेहतर पशु प्रबंधन और बढ़े दुग्ध उत्पादन के माध्यम से उनकी आजीविका में आया बदलाव ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सेवा संकल्प की भावना को धरातल पर साकार करने की प्रेरक मिसाल है।
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