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Chhattisgarh High Court: विभागीय जांच में प्रक्रिया की अनदेखी पड़ी भारी, हाईकोर्ट ने पटवारी की बर्खास्तगी रद्द की

Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विभागीय जांच में तय प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं होने पर पटवारी विजय कुमार ठाकुर की बर्खास्तगी रद्द कर दी। कोर्ट ने उन्हें सेवा में बहाल करने और नियमानुसार सभी लाभ देने के निर्देश दिए।

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प्रकाशित: 29 Aug 2026, 04:04 PM · अपडेट: 10 Oct 2026, 04:28 AM
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarh High Court: बिलासपुर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पटवारी की बर्खास्तगी से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने विभागीय जांच में तय प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए सेवा से बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही कलेक्टर के अपीलीय आदेश को भी निरस्त करते हुए पटवारी को दोबारा सेवा में लेने और नियमानुसार सभी सेवा लाभ देने के निर्देश दिए। मामला पटवारी विजय कुमार ठाकुर से जुड़ा है। उन्हें 4 जनवरी 2007 को पटवारी के पद पर नियुक्त किया गया था और खैरागढ़ तहसील में पदस्थ किया गया था। 
वर्ष 2015 में उनके खिलाफ पंचायत आम चुनाव से जुड़े सरकारी कार्य नहीं करने, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं करने और 27 जनवरी 2015 को बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप लगाए गए थे। आरोपों के बाद उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई। 

हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

जांच पूरी होने के बाद 13 मार्च 2015 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मोहला ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी के आदेश के खिलाफ विजय कुमार ठाकुर ने कलेक्टर के समक्ष अपील दायर की। उन्होंने कहा कि अनुविभागीय अधिकारी उन्हें सेवा से बर्खास्त करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं थे। इसके अलावा उन्होंने विभागीय जांच में जरूरी दस्तावेज और जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप लगाया। याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्हें अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने का पर्याप्त अवसर भी नहीं दिया गया। हालांकि, कलेक्टर ने 13 अक्टूबर 2015 को उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद संभागीय आयुक्त के समक्ष दायर दूसरी अपील को भी 25 मई 2017 को पोषणीय नहीं मानते हुए खारिज कर दिया गया। मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ में हुई। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और विभागीय जांच से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद माना कि जब विभाग ने नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी, तब उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ना चाहिए था। 

हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश किया रद्द

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच के दौरान केवल प्रशासनिक निर्देशों का सहारा लेकर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत मिले संरक्षण के विपरीत है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि जांच रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण याचिकाकर्ता को अपने बचाव का प्रभावी अवसर नहीं मिल पाया। इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने बर्खास्तगी और कलेक्टर के अपीलीय आदेश को निरस्त करते हुए विजय कुमार ठाकुर को सेवा में बहाल करने तथा नियमानुसार सभी लाभ देने के निर्देश दिए।
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