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Chhattisgarhi language school curriculum meeting (Image Source: AI Photo)
Chhattisgarhi language school curriculum meeting (Image Source: AI Photo)
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Chhattisgarhi Subject: स्कूलों में अब अलग से पढ़ाई जाएगी छत्तीसगढ़ी भाषा, 18 बोलियों में तैयार हो रहा पाठ्यक्रम

Chhattisgarhi Subject: स्कूलों में कक्षा 1 से 12वीं तक छत्तीसगढ़ी भाषा को स्वतंत्र विषय के रूप में शामिल करने की तैयारी चल रही है। SCERT ने पाठ्यक्रम, पढ़ाने की व्यवस्था और लागू करने की रणनीति पर मंथन तेज कर दिया है। अंतिम मंजूरी राज्य शासन की ओर से दी जाएगी।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 08 Oct 2026, 08:08 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarhi Subject: माटी की खुशबू और स्थानीय संस्कृति को अब राज्य की शिक्षा व्यवस्था में और गहराई से शामिल करने की बड़ी तैयारी चल रही है। आने वाले शैक्षणिक सत्र से राज्य के स्कूलों में प्राथमिक (कक्षा 1) से लेकर हायर सेकेंडरी (कक्षा 12) तक छत्तीसगढ़ी भाषा को एक स्वतंत्र और अनिवार्य/अलग विषय के रूप में पढ़ाया जा सकता है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। शंकर नगर स्थित एससीईआरटी कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस खाके को अंतिम रूप देने पर मंथन किया। हालांकि, इस नए पाठ्यक्रम और व्यवस्था पर अंतिम मुहर राज्य शासन की ओर से लगाई जाएगी।

तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, विशेषज्ञ संभाल रहे कमान 

एससीईआरटी में हुई इस अहम बैठक में पाठ्यक्रम के स्वरूप, हर कक्षा के अनुसार पढ़ाई के तरीके और इसे धरातल पर लागू करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मौजूद विशेषज्ञों और अधिकारियों ने साफ किया कि पूरी प्रक्रिया को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि नए सत्र से बच्चों के बस्ते में छत्तीसगढ़ी भाषा की किताबें जुड़ सकें। इस महत्वपूर्ण बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक जेपी रथ, उप सचिव बी. रघु, पद्मश्री महेंद्र मिश्रा, सुशील राठौर, डेगेश्वर वर्मा, राजीव गुप्ता और यशवंत चतुर्वेदी समेत प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारी और प्राचार्य शामिल हुए।

नई शिक्षा नीति और 18 स्थानीय बोलियों का साथ 

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बच्चों को उनकी मातृभाषा और क्षेत्रीय बोलियों के जरिए शिक्षा देने पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) तक बच्चों को स्थानीय भाषाओं से जोड़ने की पहल पहले से ही जारी है।
  • 18 बोलियों का संग्रह: राज्य में छत्तीसगढ़ी भाषा के अलावा सरगुजिहा, हल्बी, सादरी, गोंडी और कुड़ुख जैसी कुल 18 स्थानीय बोलियों व भाषाओं में पाठ्यसामग्री तैयार की गई है।

  • मौजूदा व्यवस्था: वर्तमान में पहली से तीसरी कक्षा तक हिंदी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी और स्थानीय बोलियों को त्रिभाषीय रूप में शामिल किया गया है। वहीं चौथी और पांचवीं कक्षा में हिंदी के साथ क्षेत्रीय बोलियों को जोड़ा गया है।

  • आगे का बदलाव: अब तक जो छत्तीसगढ़ी केवल पाठों का हिस्सा थी, उसे अब कक्षा 1 से 12 तक एक पूरे स्वतंत्र विषय के रूप में स्थापित करने की तैयारी है।

छत्तीसगढ़ी भाषा को यह सम्मान मिलने से न केवल प्रदेश के बच्चों को अपनी संस्कृति और जड़ों को समझने का अवसर मिलेगा, बल्कि भाषाई गौरव भी बढ़ेगा।

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